बीआरएस नेता के. कविता
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दिल्ली हाईकोर्ट में शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बीआरएस नेता के कविता की जमानत याचिका का विरोध किया। जांच एजेंसी ने कहा कि उनकी रिहाई से घोटाले का पता लगाने के लिए आगे की जांच पर प्रभावित हो सकती है। ईडी ने कविता की जमानत याचिका पर अपने जवाब में दलील दी कि तेलंगाना के विधायक एक बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं। उन पर गंभीर आर्थिक अपराध करने का आरोप है। इसमें कहा गया है कि उसमें सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने की क्षमता है।
आरोपी ने अन्य लोगों के साथ साजिश रची और 100 करोड़ रुपये की रिश्वत के भुगतान में सक्रिय रूप से शामिल रही। फिर अपने प्रॉक्सी के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग इकोसिस्टम यानी मेसर्स इंडो स्पिरिट्स की स्थापना की, जिससे 192.8 करोड़ रुपये की अपराध आय हुई। जांच एजेंसी ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा कि इस तरह के कृत्यों से के कविता 292.8 करोड़ रुपये की अपराध आय (पीओसी) से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं और गतिविधियों में शामिल है।
शुक्रवार को न्यायाधीश स्वर्ण कांता शर्मा ने कविता के वकील की आंशिक दलीलें सुनीं। साथ ही, मामले को 27 मई को आगे की कार्यवाही के लिए सूचीबद्ध किया। कविता ने ट्रायल कोर्ट के 6 मई के आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत सीबीआई के भ्रष्टाचार मामले के साथ-साथ ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। कविता के वकील ने कहा कि उत्पाद शुल्क मामले में 50 आरोपियों में से वह अकेली महिला है। अदालत से उसे जमानत देने पर विचार करने का आग्रह किया, क्योंकि कानून महिलाओं को एक अलग स्थान पर रखता है।
सह-अभियुक्त अरुण रामचंद्रन पिल्लई द्वारा दायर एक अन्य याचिका में, सीबीआई ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि भ्रष्टाचार मामले में उनकी कथित भूमिका के लिए जून के पहले सप्ताह तक कविता के खिलाफ आरोप पत्र दायर करने की संभावना है। कविता की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने कहा कि उसे मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध से जोड़ने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। अपराध की आय की भारी मात्रा को सफेद किया गया पाया गया है। अपराध की आय का पता लगाने के लिए जांच जारी है। अगर उसे जमानत पर रिहा किया गया, तो महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो जाने की उचित आशंका है। इसमें कहा गया है कि जमानत पर उसकी रिहाई से गहरी बहुस्तरीय साजिश का पता लगाने के लिए आगे की जांच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।