- हर ड्रेन पर नोडल अधिकारी, 15 मई तक पंप तैयार क्विक रिस्पॉन्स टीमें रहेंगी तैनात
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राजधानी में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने के लिए एमसीडी ने इस बार पहले से ही सख्त रणनीति तैयार कर ली है। आयुक्त संजीव खिरवार ने सिविक सेंटर में हुई उच्चस्तरीय बैठक में साफ कहा कि इस बार किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभागों को तय समयसीमा में काम पूरा करना होगा।
आयुक्त ने बैठक में ड्रेनों की डी-सिल्टिंग को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए गए कि बड़े और छोटे सभी नालों की सफाई समय पर पूरी की जाए। जिन इलाकों में हर साल जलभराव की समस्या गंभीर रहती है, वहां विशेष एक्शन प्लान लागू किया जाएगा। इन संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पंप, मशीनरी और मैनपावर पहले से तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं।
जवाबदेही तय करने के लिए हर ड्रेन पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। इसके साथ ही, पिछले साल सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में क्विक रिस्पॉन्स टीमें गठित की जाएंगी, जो आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर पानी निकासी सुनिश्चित करेंगी। एमसीडी ने पंपिंग सिस्टम को दुरुस्त करने पर भी जोर दिया है। सभी स्थायी पंपिंग स्टेशनों की सफाई और मशीनों की सर्विसिंग के साथ 465 पोर्टेबल पंपों को 15 मई 2026 तक तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
डी-सिल्टिंग कार्य की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आरडब्ल्यूए, पार्षदों और विधायकों को भी निगरानी में शामिल किया जाएगा। साथ ही, नालों से निकली गाद को तीन से पांच दिनों के भीतर हटाना अनिवार्य किया गया है, ताकि दोबारा जलभराव की स्थिति न बने। एमसीडी ने संकेत दिया है कि इस बार रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू होगा, जिससे किसी भी स्तर पर लापरवाही तुरंत पकड़ी जा सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।