नई दिल्ली। स्थायी समिति की बुधवार को हुई बैठक में टोल टैक्स से जुड़े मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। समिति के अध्यक्ष सत्या शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में नगर निगम का पक्ष मजबूती के साथ रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि टोल टैक्स निगम की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और इसके बंद होने से राजस्व व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। सत्या शर्मा ने कहा कि इस विषय पर सभी पार्षदों और संबंधित अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक भी बुलाई जाएगी। बैठक में टोल टैक्स से जुड़े सभी अहम बिंदुओं पर समन्वय के साथ चर्चा होगी, ताकि सुप्रीम कोर्ट में निगम की ओर से प्रभावी और ठोस पक्ष प्रस्तुत किया जा सके। उनका कहना है कि केवल कानूनी नहीं, बल्कि व्यावहारिक और जनहित से जुड़े पहलुओं को भी अदालत के सामने रखा जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि टोल टैक्स पूरी तरह से बंद होता है तो निगम की आमदनी में गिरावट आएगी। इसका सीधा असर नागरिक सुविधाओं और विकास कार्यों पर पड़ेगा। सड़क मरम्मत, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पार्कों के रखरखाव और अन्य बुनियादी सेवाओं के लिए आवश्यक फंड की कमी हो सकती है। ऐसे में निगम हित और जनहित दोनों को ध्यान में रखते हुए संतुलित समाधान जरूरी है। बैठक में यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने ट्रैफिक प्रवाह को बेहतर बनाने और वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से कुछ टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने, स्थानांतरित करने या फिर राजस्व साझा करने जैसे विकल्पों पर विचार करने के निर्देश दिए हैं। अदालत का फोकस राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या से राहत दिलाने पर है।
सत्या शर्मा ने कहा कि निगम इन निर्देशों का सम्मान करता है, लेकिन यह भी जरूरी है कि निगम की वित्तीय स्थिति कमजोर न हो। उन्होंने कहा कि टोल टैक्स से मिलने वाला राजस्व नगर निगम की कई महत्वपूर्ण सेवाओं को चलाने में मदद करता है। यदि यह स्रोत कमजोर होता है तो आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है।