एमसीडी की पहल पर महापौर, उपमहापौर व स्थायी समिति के छह सदस्यों के चुनाव के लिए गत 24 जनवरी को सदन की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन इस बैठक में पार्षदों को शपथ दिलाने के बाद हंगामा हो गया। इस कारण बैठक में चुनाव प्रक्रिया आरंभ नहीं हो सकी। एमसीडी ने एक बार फिर सदन की बैठक बुलाने के लिए गत शुक्रवार को पहल करने का निर्णय लिया था, लेकिन इससे पहले आम आदमी पार्टी ने सदन की बैठक में चुनाव नहीं होने के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। इस कारण एमसीडी ने सदन की बैठक बुलाने के लिए शुक्रवार को पहल नहीं की।
एमसीडी के अधिकारियों के अनुसार अब वह अपनी ओर से सदन की बैठक बुलाने की पहल नहीं करेंगे। इसके अलावा एमसीडी गत 24 जनवरी को सदन की बैठक में महापौर का चुनाव नहीं होने और हंगामा होने के संबंध में भी उपराज्यपाल को रिपोर्ट नहीं देगी। एमसीडी ने सदन की बैठक बुलाने की पहल करने के दौरान ही पिछली बैठक में चुनाव न होने और हंगामा होने के बारे में रिपोर्ट देनी थी। इस बारे में वह सुप्रीम कोर्ट में आम आदमी पार्टी की याचिका पर आने वाले आदेश के बाद ही कार्रवाई करेगी।
उपराज्यपाल को रिपोर्ट नहीं देने का निर्णय लिया
दूसरी ओर पीठासीन अधिकारी सत्या शर्मा ने भी अभी सदन की बैठक में हंगामा होने के मामले में उपराज्यपाल को रिपोर्ट नहीं देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद ही वह उपराज्यपाल से मिलेंगी, क्योंकि अभी सदन की बैठक बुलाने का मामला लंबित हो गया है। हालांकि उपराज्यपाल उनको जब भी बुलाएंगे वह उनसे मिलने के लिए चली जाएंगी। एमसीडी के सदन की बैठक में गत छह व 24 जनवरी को चुनाव नहीं होने और हंगामा होने का आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया है। उसका कहना है कि भाजपा के नेता महापौर का चुनाव नहीं होने दे रहे हैं। आम आदमी पार्टी नेे सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाकर महापौर का चुनाव जल्द व निष्पक्ष कराने की मांग की है।