निगम चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर भाजपा में जबरदस्त खींचतान है। प्रदेश चुनाव समिति की हुई पहली बैठक में अधिकतर सांसदों व प्रदेश पदाधिकारियों के बीच टकराव बना रहा। यही कारण रहा कि शुक्रवार सुबह तक चली समिति की बैठक में एक भी वार्ड के लिए उम्मीदवार का नाम तय नहीं हो सका। प्रदेश प्रभारी बैजयंत पांडा ने सभी सांसदों व पदाधिकारियों से दावेदारों की सूची ले ली। इसके अलावा उन्होंने उम्मीदवार तय करने के लिए उप-समिति का गठन किया।
सूत्रों के अनुसार चुनाव समिति की पहली बैठक गुरुवार रात 10 बजे के बाद शुरू हुई थी, जो शुक्रवार सुबह तीन बजे तक जारी रही। इस दौरान दावेदारों की सिफारिश करने पर दक्षिण दिल्ली के सांसद रमेश बिधूड़ी व दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर बिधूड़ी, पश्चिम दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष आशीष सूद, नई दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, पूर्वी दिल्ली के सांसद गौतम गंभीर, प्रदेश महामंत्री कुलजीत चहल, उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद मनोज तिवारी, उत्तर पश्चिम दिल्ली के सांसद हंसराज हंस को प्रदेश के विभिन्न पदाधिकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। उनके बीच नोकझोंक की भी नौबत आई। दरअसल वे अपने समर्थकों को हर हाल में टिकट दिलवाने पर अड़े रहे, जबकि चांदनी चौक के सांसद डॉ. हर्षवर्धन की ओर से दावेदारों के नाम सुझाने के दौरान किसी भी पदाधिकारी का विरोध नहीं झेलना पड़ा।
बैठक में सांसदों व प्रदेश पदाधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बने रहने के कारण उम्मीदवारों के नाम तय नहीं हो सके। इस कारण प्रदेश प्रभारी बैजयंत पांडा ने सभी सांसदों व प्रदेश पदाधिकारियों को दावेदारों की सूची मांग ली। उन्होंने बताया कि अब उप-समिति उम्मीदवारों के नाम तय करेगी। इस उप-समिति में प्रदेश प्रभारी, सहप्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, प्रदेश संगठन मंत्री व दो-तीन अन्य नेता होंगे। इस उप-समिति की शुक्रवार की शाम बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार उप-समिति ने करीब सौ उम्मीदवारों के नामों पर मुहर लगा दी है। इनमें अधिकतर मजबूत उम्मीदवार है और उनके जीतने के आसार हैं। दूसरी ओर उप-समिति ने अन्य वार्डों के लिए दावेदारों का पैनल तैयार किया, ऐसे वार्डों में दो से तीन दावेदारों के नाम रखे हैं।