एमसीडी की स्थायी समिति एक वैधानिक समिति है और इसके पास सबसे ज्यादा अधिकार है। समिति ही एमसीडी की सभी नीति व परियोजनाओं को स्वीकृति देती है। इसके अलावा एमसीडी के बजट का खाका भी तैयार करती है।
विपक्ष के मजबूत होने से इस बार एमसीडी में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को एकतरफा बहुमत मिलना मुश्किल है। भाजपा भी अपने स्तर पर स्थायी समिति में मजबूत होने की कोशिश कर रही है। महापौर और उपमहापौर चुनाव के दौरान भी भाजपा को उससे ज्यादा वोट मिले, जितने उसके वोट हैं।
एमसीडी के सदन के अलावा स्थायी समिति की बैठक में ही आयुक्त व तमाम वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। इसके अलावा आयुक्त की ओर से समिति में सभी परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाते हैं। इसके अलावा बजट प्रस्तावों के साथ-साथ टैक्स व फीस में बढ़ोतरी के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए जाते हैं।
समिति विभिन्न टैक्स व फीस में छूट देनेे का अधिकार भी रखती है। वहीं बजट में पास किए जाने वाले प्रस्तावों को समिति ही लागू कराती है और समिति के अध्यक्ष अपनी पार्टी के चुनावी वादों को पूरा कराने के प्रस्ताव भी पास करते हैं।
समिति में पास होने वाले नीतिगत निर्णय संबंधी परियोजनाओं के प्रस्ताव सदन में अंतिम स्वीकृति के लिए जाते हैं। सदन में इन प्रस्तावों को हरी झंडी मिलने में दिक्कत नहीं होती, क्योंकि यह सभी परियोजनाएं जनता व एमसीडी के हित से जुड़ी होती हैं, जबकि निर्माण कार्य संबंधी प्रस्ताव पास करने का अधिकार उसके पास ही है। इसके अलावा दिल्ली में तमाम केंद्र, राज्य सरकार के विभागों व अन्य एजेंसियों के भवनों बनाने की योजनाओं के ले-आउट प्लान को हरी झंडी भी समिति ही देती है।