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MCD: आप के तमाम प्रयासों के बाद भी स्टैंडिंग कमेटी का चेयरमैन पद भाजपा को जाना तय, ये है वजह

Fri, 24 Feb 2023 01:57 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आम आदमी पार्टी का एक पार्षद आज सुबह ही भाजपा में शामिल हो गया है। इसके बाद से स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव का सारा गणित गड़बड़ा गया है।
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सदन की कार्यवाही चलती हुई - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली नगर निगम में बहुमत हासिल करने और मेयर-डिप्टी मेयर का चुनाव जीतने के बाद भी आम आदमी पार्टी स्टैंडिंग कमेटी में अपना चेयरमैन नहीं बनवा पाएगी। नगर निगम में स्थायी समिति सबसे महत्वपूर्ण और ताकतवर समिति होती है। सदन में जीती हुई हर पार्टी चाहती है कि उसका पार्षद ही कमेटी का चेयरमैन बने। लेकिन आम आदमी पार्टी तमाम कोशिशों के बाद भी ऐसा नहीं कर पाएगी।

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दरअसल आम आदमी पार्टी का एक पार्षद आज सुबह ही भाजपा में शामिल हो गया है। इसके बाद से स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव का सारा गणित गड़बड़ा गया है। अब जितने वोट पड़ेंगे उनकी गिनती आनुपातिक रूप में होगी जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी के तीन-तीन सदस्यों का जीतना तय माना जा रहा है।

इसके साथ ही जोनल स्तर पर सात भाजपा सदस्यों के चुनकर आने की बात कही जा रही है। ऐसे में 18 सदस्यों वाली स्टैंडिंग कमेटी में 10 सदस्य भाजपा के होंगे तो वह बहुमत में होगी। ऐसे में चेयरमैन भी भाजपा का ही बनेगा।

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इस तरह से टक्कर

  • स्थायी समिति में 18 सदस्य होते हैं। इसमें से छह सदस्य सदन से चुने जाते हैं, जबकि एमसीडी की 12 वार्ड समितियों से एक-एक सदस्य का चुनाव होता है।
  • 18 सदस्यों में एक सदस्य स्थायी समिति का अध्यक्ष बनता है। चुनाव होने की सूरत में उसे दस वोट चाहिए होते हैं।
  • सदन में दलीय स्थिति के अनुसार, अभी आम आदमी पार्टी व भाजपा से स्थायी समिति के लिए तीन-तीन सदस्य चुने जा सकते हैं।
  • 12 वार्ड समितियों में से पांच-पांच समिति में भाजपा व आप का बहुमत है। दो समितियों में से एक में दोनों का आंकड़ा बराबर है, जबकि दूसरे में जीत की चाबी कांग्रेस के पास है। सदन की तरह अगर कांग्रेस वार्ड समितियों के चुनाव का भी कांग्रेस बहिष्कार करती है तो एक वार्ड समिति में भाजपा का कब्जा संभव है। बची एक वार्ड समिति का गठन पूरी तरह से चुनावी प्रबंधन पर निर्भर है। जो भी दल दूसरे से आगे बढ़कर चुनाव का प्रबंधन कर लेगा, उसके पास यह सीट आ जाएगी।
  • अगर दोनों वार्ड समितियां भाजपा के पाले में जाती हैं तो स्थायी समिति पर उसका कब्जा हो सकता है। इसका उलटा होने पर आप के हाथ में स्थायी समिति की कमान आने की संभावना है।
  • दिलचस्प यह कि वार्ड समिति का गणित मनोनीत सदस्य तय कर रहे हैं। पार्षद मनोनीत होने से पहले वार्ड समितियों में आप का पलड़ा भारी था। उसके पास आठ समितियों व भाजपा को केवल चार समितियों में बहुमत प्राप्त था। मनोनीत सदस्यों ने सिविल लाइंस में बहुमत दिलाया। मध्य क्षेत्र वार्ड कमेटी में कांग्रेस के हाथ में चाबी दी और नरेला में भाजपा को आप के बराबर लाकर खड़ा कर दिया।

एमसीडी की सत्ता का केंद्र होती है स्थायी समिति

एमसीडी की स्थायी समिति एक वैधानिक समिति है और इसके पास सबसे ज्यादा अधिकार है। समिति ही एमसीडी की सभी नीति व परियोजनाओं को स्वीकृति देती है। इसके अलावा एमसीडी के बजट का खाका भी तैयार करती है।

विपक्ष के मजबूत होने से इस बार एमसीडी में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी को एकतरफा बहुमत मिलना मुश्किल है। भाजपा भी अपने स्तर पर स्थायी समिति में मजबूत होने की कोशिश कर रही है। महापौर और उपमहापौर चुनाव के दौरान भी भाजपा को उससे ज्यादा वोट मिले, जितने उसके वोट हैं।

एमसीडी के सदन के अलावा स्थायी समिति की बैठक में ही आयुक्त व तमाम वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते हैं। इसके अलावा आयुक्त की ओर से समिति में सभी परियोजनाओं के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाते हैं। इसके अलावा बजट प्रस्तावों के साथ-साथ टैक्स व फीस में बढ़ोतरी के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए जाते हैं।
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समिति कई टैक्स और फीस में छूट देने का रखती है अधिकार

समिति विभिन्न टैक्स व फीस में छूट देनेे का अधिकार भी रखती है। वहीं बजट में पास किए जाने वाले प्रस्तावों को समिति ही लागू कराती है और समिति के अध्यक्ष अपनी पार्टी के चुनावी वादों को पूरा कराने के प्रस्ताव भी पास करते हैं।

समिति में पास होने वाले नीतिगत निर्णय संबंधी परियोजनाओं के प्रस्ताव सदन में अंतिम स्वीकृति के लिए जाते हैं। सदन में इन प्रस्तावों को हरी झंडी मिलने में दिक्कत नहीं होती, क्योंकि यह सभी परियोजनाएं जनता व एमसीडी के हित से जुड़ी होती हैं, जबकि निर्माण कार्य संबंधी प्रस्ताव पास करने का अधिकार उसके पास ही है। इसके अलावा दिल्ली में तमाम केंद्र, राज्य सरकार के विभागों व अन्य एजेंसियों के भवनों बनाने की योजनाओं के ले-आउट प्लान को हरी झंडी भी समिति ही देती है।
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