मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम का एमसीडी के जूनियर अधिकारियों पर कोई असर नहीं है। मंगलवार को इसका खुलासा भी हो गया।
बीजेपी के पार्षदों ने किया विरोध
उत्तरी दिल्ली नगर निगम में सोमवार को पहुंचे 15 सौ बेलदारों के तबादले के आदेश पर हुए ड्रामे के बाद मंगलवार को आयुक्त को अपने आदेश वापस लेने पड़े। इंजीनियर और बेलदारों के अलावा सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षदों ने भी तबादलों पर आपत्ति जताई थी।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के आयुक्त पीके गुप्ता ने छह जोन में कार्यरत करीब 15 सौ बेलदारों को एक जोन से हटा कर दूसरे जोन में तबादला कर दिया था। कई वर्षों से एक ही जगह कार्यरत काफी बेलदारों की सही तरीके से ड्यूटी नहीं करने की शिकायतें थी।
भवन विभाग में सक्रिय कुछ बेलदारों पर अवैध निर्माण करवाने और अधिकारियों के लिए वसूली करने के भी आरोप थे। ऐसे कई बेलदार भ्रष्टाचार निरोधक शाखा और सीबीआई के हत्थे चढ़ चुके हैं। पिछले दिनों सिविल लाइन जोन में एक बैंक्वेट हाल के निर्माण में सीबीआई ने अधिकारियों के साथ-साथ कई बेलदारों को गिरफ्तार किया था।
नगर निगम की छवि सुधारने की मंशा से आयुक्त की ओर से जारी तबादला आदेश शुक्रवार का है। लेकिन शनिवार-रविवार अवकाश के चलते आदेश सोमवार देर शाम विभाग को मिला। जोन परिवर्तन की जानकारी मिलते ही इंजीनियर्स, बेलदारों और निगम पार्षदों में हड़कंप मच गया।
उन्होंने एकजुटता दिखाते हुए मंगलवार को अपने-अपने स्तर पर आयुक्त के आदेश का विरोध करना शुरू कर दिया। विरोध शुरू होने के 24 घंटे के भीतर ही आयुक्त ने अपना आदेश वापस ले लिया। सूत्रों के अनुसार आयुक्त ने अब केवल भवन विभाग में कार्यरत बेलदारों का तबादला करने का फैसला किया है। जिनकी संख्या तबादले किए गए बेलदारों की संख्या के मुकाबले चौथाई ही है। वर्कर्स विभाग के बेलदारों को इधर-उधर नहीं किया जाएगा।