एमसीडी की स्थायी समिति के गठन का मामला उलझने के कारण अन्य तमाम समितियों का गठन नहीं होने के साथ-साथ डीडीए, दिल्ली जल बोर्ड व दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) में पार्षदों को निर्वाचित व मनोनीत करने का मसला भी लटका हुआ है। इस कारण डीडीए व दिल्ली जल बोर्ड में एमसीडी व पार्षदों से जुड़े मुद्दे नहीं उठ पा रहे है। दरअसल, एमसीडी के सदन की बैठक नियमित नहीं होने के कारण डीडीए, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड व दिल्ली जल बोर्ड में पार्षदों को भेजने की पहल नहीं हो पा रही है।
एमसीडी से डीडीए, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड व दिल्ली जल बोर्ड में दो-दो पार्षदों को भेजा जाता है। डीडीए में दोनों पार्षदों को एमसीडी के सदन में चुनाव करके भेजा जाता है। इस दौरान पार्षदों की अधिक वोट प्राप्त करने वाले दो पार्षद के सदस्य चुने जाते है। इन सदस्यों का उनके पार्षद कार्यकाल तक कार्यकाल रहता है, वहीं दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड व दिल्ली जल बोर्ड में दो-दो पार्षद महापौर मनोनीत करता है। इस संबंध में सदन उनको अधिकार देता है। इन दोनों बोर्ड में सत्तापक्ष की सिफारिश के तहत महापौर पार्षदों को मनोनीत करता है। इन सदस्यों का दो साल का कार्यकाल होता है। मगर इस बार डीडीए व दो बोर्ड में पार्षदों को नहीं भेजा गया है।
स्थायी समिति का मामला कोर्ट में विचाराधीन
एमसीडी के मुताबिक सदन से स्थायी समिति के छह सदस्यों का चुनाव विवादों में आने के कारण डीडीए, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड व दिल्ली जल बोर्ड में पार्षदों का भेजने का मामला लटका हुआ है। दरअसल, स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव का मामला कोर्ट में विचाराधीन है। एमसीडी में दलीय स्थिति के अनुसार आम आदमी पार्टी सत्तारूढ़ है। इस कारण दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड व दिल्ली जल बोर्ड में उसके पार्षदों का मनोनीत होना तय है। महापौर आप की सिफारिश के तहत पार्षदों को मनोनीत करेगी। वहीं डीडीए में आप व भाजपा का एक-एक पार्षद जाने की संभावना है।