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नरेंद्र मोदी का आदेश नहीं मान रही भाजपा की मनोहर सरकार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जनता को राहत देने वाला एक आदेश हरियाणा सरकार नहीं मान रही है। जबकि, यहां भाजपा की ही सरकार है। हम बात कर रहे हैं विभिन्न प्रकार के सरकारी फार्मों के सत्यापन की।
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प्रधानमंत्री ने सभी प्रदेश सरकारों को निर्देश दिए थे कि वह अपने यहां सत्यापन की अनिवार्यता को समाप्त कर स्व सत्यापन को मान्यता दें।

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से 14-15 नवंबर को आयोजित की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (एचटेट) को लेकर इसके आवेदक परेशान हैं।
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एडमिट कार्ड सत्यापन के लिए किया जा रहा मजबूर

आवेदकों को एडमिट कार्ड अटेस्ट करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। जब कई राज्यों में स्वयं सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है तो यहां पर एडमिट कार्ड अधिकारियों से सत्यापित करवाने पर मजबूर किया जा रहा है।

परीक्षार्थियों के दोहरे हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान सहित बायोमैट्रिक हाजिरी भी लगवाने के आदेश हैं। छात्रों द्वारा आवेदन के वक्त दिए गए आधार नंबर के जरिए रिकॉर्ड और अंगूठे का पूरा मिलान किया जाएगा।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ऐसी व्यवस्था के बावजूद सत्यापन अनिवार्य किया गया है। जबकि परीक्षार्थियों का सारा रिकार्ड बोर्ड के पास है।
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अपने आका का आदेश क्यों नहीं मान रही सरकार

एचटेट में आवेदक सीमा कुमारी का कहना है कि सरकार जान बूझकर परीक्षार्थियों को परेशान कर रही है। केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटेट) में ऐसा नहीं था। सीटेट केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड करवाता है, जो केंद्र सरकार के अधीन आता है।

कांग्रेस सरकार में पूर्व मंत्री रहे आफताब अहमद का कहना है कि हरियाणा सरकार अपने ही आका का आदेश नहीं मान रही है इससे समझा जा सकता है कि यहां पर कैसा काम हो रहा है। अटेस्ट करने की प्रक्रिया को केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है तो राज्य में यह क्यों लागू है।

शिक्षाविद अशोक दिवाकर के मुताबिक पिछले एक साल से एमडीयू और कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में सेल्फ अटेस्ट को महत्व दिया जा रहा है। ऐसे में हरियाणा शिक्षा बोर्ड क्यों लाखों विद्यार्थियों को परेशान कर रहा है। छात्र राजपत्रित अधिकारियों से एडमिट कार्ड अटेस्ट करवाने के चक्कर में पढ़ाई छोड़कर भटक रहे हैं।
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