सेक्टर-63 पुलिस चौकी के सामने सोमवार दोपहर हथियारबंद कार सवार बदमाशों ने डकैती डाली। एक वैन को ओवरटेक कर रुकवाने के बाद बदमाश एक्सपोर्ट कंपनी के अकाउंटेंट से 29 लाख रुपये ले गए।
कैश एक्सपोर्ट कंपनी के कर्मचारियों को वेतन देने के लिए लाया जा रहा था। कंपनी कर्मचारियों ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। करीब 20 मिनट बाद फेस-3 थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
सेक्टर-63 के सी-116 में यूनाइटेड एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड नाम की रेडीमेड गारमेंट की एक्सपोर्ट कंपनी है। कंपनी में करीब 500 कर्मचारी है।
कार से पांच नकाबपोश बदमाश उतरे
बताया गया है कि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सेक्टर-63 स्थित एक प्राइवेट बैंक से कैश लेकर कंपनी का अकाउंटेंट हरी नारायण कैश वैन से कंपनी की ओर आ रहा था।
वैन कंपनी का चालक राम चला रहा था। कंपनी के कर्मचारी और प्रत्यक्षदर्शी अमित चौधरी के अनुसार कंपनी के सामने जब यू टर्न लेने के लिए चालक ने वैन को थोड़ा धीमा किया, तभी पीछे से आई सिल्वर कलर की वैगन आर कार सवार हथियारबंद छह बदमाशों ने ओवरटेक कर वैन को रोक लिया।
कार से पांच नकाबपोश बदमाश उतरे। जब तक राम और हरी नारायण कुछ समझ पाते, तब तक बदमाशों ने चारों ओर से वैन को घेर लिया। इनमें से एक बदमाश ने लोहे के पाना से चालक की सीट की तरफ का शीशा तोड़ दिया।
इसके बाद बदमाशों ने हरी नारायण को जान से मारने की धमकी देकर 29 लाख रुपयों से भरा बैग छीन लिया। वारदात के बाद बदमाश हथियार लहराते हुए कार से फरार हो गए। वारदात सेक्टर-63 पुलिस चौकी से 20 मीटर की दूरी पर हुई।
थाने की पुलिस पहले चौकी की पहुंची बाद में
कंपनी कर्मियों की सूचना के 20 मिनट बाद सेक्टर-63 थाना पुलिस वहां पहुंची। वारदात के दौरान सेक्टर-63 चौकी इंचार्ज गिरीश चंद्र यादव इलाके में मौजूद नहीं थे। यही कारण रहा कि चौकी की पुलिस घटनास्थल पर बाद में, जबकि थाने की पुलिस पहले पहुंच गई।
दिनदहाड़े हुई वारदात की सूचना मिलने के दो घंटे बाद एसएसपी किरण एस घटनास्थल का मुआयना करने पहुंचे। वहीं एसपी सिटी दिनेश यादव सवा घंटे और डीएसपी डॉ. अनूप कुमार यादव एक घंटे बाद हालात का जायजा लेने और अपराधियों की धड़पकड़ के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों को निर्देश देने मौके पर पहुंचे।
सेक्टर-63 पुलिस चौकी के सामने हुई वारदात की सूचना पर देर से पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने डकैती का गुस्सा रेहड़ी पटरी वालों पर उतारा। उनसे पूछताछ की और उनकी दुकानें हटवा दीं। लोगों का कहना है कि जबकि इन दुकानों पर पुलिस अधिकारियों की नजर रोज पड़ती है।