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रियलिटी चेकः दिल्ली में चोरी-चोरी बिक रहा ‘मौत का मांझा’

Wed, 28 Aug 2019 06:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा शुजात आलम, नई दिल्ली
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मांझा - फोटो : अमर उजाला
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प्रतिबंध के बावजूद राजधानी के बाजारों में ‘मौत का मांझा’ चोरी-चोरी बिक रहा है। दिल्ली के पतंगों के सबसे बड़े बाजार लालकुआं में बैठे कारोबारी सीधे पूछने पर मना करते हैं, लेकिन सूत्रों का दावा है कि वे चोरी-छुपे अपने जानकारों को चीनी मांझा बेच रहे हैं। 
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यह हकीकत मंगलवार को लालकुआं बाजार में अमर उजाला की टीम के रियलिटी चेक के दौरान सामने आई। वैसे चीनी मांझे से लगातार हो रही मौतों का मामला सोमवार को दिल्ली विधानसभा में जोर-शोर से उठा था। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने मुख्य सचिव से इसकी जांच कराने की बात कही थी।

रियलिटी चेक के दौरान वार्ता में एक दुकानदार रिहान ने कहा कि पतंगें बेचना उनका पुश्तैनी काम है। कई दशकों से देशभर के लोग लालकुआं में पतंगें, मांझा, डोर, चर्खी आदि लेने आते हैं। समय के साथ-साथ लोगों की रुचि पतंग उड़ाने में कम होती गई। इसीलिए ऑफ सीजन में लालकुआं में पतंग की 10 से 15 दुकानें ही रह जाती हैं। 
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चीनी मांझा मांगने पर रिहान ने कहा कि उन्होंने कभी यह मांझा नहीं बेचा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर बाजार में 100 से अधिक सीजनल दुकानें खुलती हैं। ज्यादातर लोग जयपुर और अन्य जगहों से आते हैं। वही लोग चीनी मांझा बेचते हैं। रिहान ने कहा कि समय-समय पर पुलिस, पेटा और एनजीटी की टीमें मार्केट में छापेमारी करती हैं।

कुछ अन्य दुकानदारों से ग्राहक बनकर चीनी मांझा मांगा गया तो एक बार झिझकने के बाद उन्होंने अपने पास इसके न होने की बात कह दी। यह बात और है कि 29 जुलाई को पुलिस ने लालकुआं की दुकान नंबर-1917 पर छापेमारी कर वहां से भारी मात्रा में चीनी मांझा बरामद कर दुकानदार हिमांशु (37) को गिरफ्तार किया था।

उधर, मार्केट में पतंग खरीदने आए जामा मस्जिद निवासी अब्दुल सलीम ने कहा कि उसे लालकुआं से ही आसानी से चीनी मांझा मिल जाता है। दुकानदार अपनी दुकान पर नहीं, बल्कि पीछे के गोदाम से चोरी-छिपे लाकर उसे चीनी मांझा देते हैं। कुछ अन्य लोगों ने भी लालकुआं मार्केट में चीनी मांझा मिलने की बात कही।
 
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अब दिल्ली में ही बन रहा चीनी मांझा

जाफराबाद में पतंगों का कारोबार करने वाले फुरकान ने बताया कि शुरुआत में चीनी मांझा चीन से आता था। धीरे-धीरे यह भारत में ही बनने लगा। शुरुआत में यह खुलेआम बनाया जाता था, लेकिन पाबंदी लगने के बाद चोरी-छुपे बनाया जाता है। दिल्ली के नरेला, सोनिया विहार, उत्तम नगर, तेहखंड, गाजियाबाद के लोनी और गौतमबुद्ध नगर में चीनी मांझा बनाया जा रहा है।

साधारण सूती मांझे की तुलना में बेहद सस्ता
चीनी मांझे की तुलना में परंपरागत सूती मांझा महंगा पड़ता है। इसकी 6 रील की चर्खी की शुरुआती कीमत एक हजार रुपये से ज्यादा ही है। इसमें करीब 5400 मीटर मांझा होता है। उधर, चीनी मांझा प्लास्टिक का बना होता है और जल्दी से टूटता नहीं है। चीनी मांझे के एक रोल की कीमत महज 250 रुपये के आसपास है, जिसमें करीब तीन हजार मीटर मांझा होता है। थोक के दुकानदारों को यह और भी सस्ता पड़ता है।

इस साल दर्ज मामले
वर्ष 2019 में दिल्ली में चीनी मांझा बेचने वालों के खिलाफ 28 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक मामले बाहरी दिल्ली में हैं।
दक्षिणी दिल्ली    3
पश्चिमी दिल्ली    3
द्वारका    2
उत्तर-पूर्व    2
मध्य दिल्ली    3
बाहरी दिल्ली    15

इस साल इन हादसों का बने सबब
24 अगस्त : पिता के साथ बाइक पर जा रही साढ़े चार साल की मासूम की गर्दन चीनी मांझे की चपेट में आकर कटी, मौत।
16 अगस्त : पश्चिम विहार वेस्ट इलाके में चीनी मांझे की चपेट में आकर बाइक सवार इंजीनियर युवक की गर्दन कटी। बुरी तरह घायल हुआ।
15 अगस्त : पश्चिम विहार ईस्ट इलाके में एलिवेटेड फ्लाईओवर पर बाइक सवार सिविल इंजीनियर युवक की गर्दन चीनी मांझे की चपेट में आकर कटी, मौत।
02 अप्रैल : तिमारपुर इलाके में स्कूटी पर दवा लेने निकले युवक की चीनी मांझे की चपेट में आकर मौत।
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