प्रतिबंध के बावजूद राजधानी के बाजारों में ‘मौत का मांझा’ चोरी-चोरी बिक रहा है। दिल्ली के पतंगों के सबसे बड़े बाजार लालकुआं में बैठे कारोबारी सीधे पूछने पर मना करते हैं, लेकिन सूत्रों का दावा है कि वे चोरी-छुपे अपने जानकारों को चीनी मांझा बेच रहे हैं।
यह हकीकत मंगलवार को लालकुआं बाजार में अमर उजाला की टीम के रियलिटी चेक के दौरान सामने आई। वैसे चीनी मांझे से लगातार हो रही मौतों का मामला सोमवार को दिल्ली विधानसभा में जोर-शोर से उठा था। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने मुख्य सचिव से इसकी जांच कराने की बात कही थी।
रियलिटी चेक के दौरान वार्ता में एक दुकानदार रिहान ने कहा कि पतंगें बेचना उनका पुश्तैनी काम है। कई दशकों से देशभर के लोग लालकुआं में पतंगें, मांझा, डोर, चर्खी आदि लेने आते हैं। समय के साथ-साथ लोगों की रुचि पतंग उड़ाने में कम होती गई। इसीलिए ऑफ सीजन में लालकुआं में पतंग की 10 से 15 दुकानें ही रह जाती हैं।
चीनी मांझा मांगने पर रिहान ने कहा कि उन्होंने कभी यह मांझा नहीं बेचा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर बाजार में 100 से अधिक सीजनल दुकानें खुलती हैं। ज्यादातर लोग जयपुर और अन्य जगहों से आते हैं। वही लोग चीनी मांझा बेचते हैं। रिहान ने कहा कि समय-समय पर पुलिस, पेटा और एनजीटी की टीमें मार्केट में छापेमारी करती हैं।
कुछ अन्य दुकानदारों से ग्राहक बनकर चीनी मांझा मांगा गया तो एक बार झिझकने के बाद उन्होंने अपने पास इसके न होने की बात कह दी। यह बात और है कि 29 जुलाई को पुलिस ने लालकुआं की दुकान नंबर-1917 पर छापेमारी कर वहां से भारी मात्रा में चीनी मांझा बरामद कर दुकानदार हिमांशु (37) को गिरफ्तार किया था।
उधर, मार्केट में पतंग खरीदने आए जामा मस्जिद निवासी अब्दुल सलीम ने कहा कि उसे लालकुआं से ही आसानी से चीनी मांझा मिल जाता है। दुकानदार अपनी दुकान पर नहीं, बल्कि पीछे के गोदाम से चोरी-छिपे लाकर उसे चीनी मांझा देते हैं। कुछ अन्य लोगों ने भी लालकुआं मार्केट में चीनी मांझा मिलने की बात कही।