भाजपा सांसद मेनका गांधी भारतीय राजनीति में एक प्रभावशाली राजनेता हैं। आज उनका जन्मदिन है। मेनका गांधी का जन्म 26 अगस्त 1965 में नई दिल्ली के एक सिख परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम तरलोचन सिंह आनंद और माता का नाम अअमतेश्वर आनंद हैं। मेनका गांधी ने लव मैरिज की थी, एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात संजय गांधी से हुई थी। आज उनके जन्मदिन के मौके पर जानेंगे उनकी और संजय गांधी की लव स्टोरी के कुछ पहलू...
संजय के दोस्त के घर पार्टी में हुई दोनों की मुलाकात
संजय और मेनका की पहली मुलाकात एक पार्टी के दौरान हुई। संजय अपने दोस्त की शादी से पहले होने वाली कॉकटेल पार्टी में गए थे। संजय और मेनका की मुलाकात उस लड़के ने कराई थी, जिसकी शादी होने वाली थी। पहली मुलाकात का मेनका पर कोई खास असर नहीं पड़ा, लेकिन पहली नजर में ही संजय अपना दिल हार बैठे थे, उन पर इस मुलाकात का ऐसा असर हुआ कि वह मेनका से मिलने का बहाना ढ़ूंढ़ते थे और वह अपना खाली समय मेनका के साथ बिताने लगे।
पढ़ाई के दौरान शुरू की मॉडलिंग
मेनका को मॉडलिंग का शौक था, दिल्ली के श्री राम कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने मॉडलिंग शुरू की। उस समय मेनका ने कई ब्यू्टी कॉम्पीटिशन भी जीते। इस दौरान उन्होंने पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई को छोड़कर पत्रकार बनने की तैयारी शुरू की।
इंदिरा से मिलते वक्त डरी सहमी थीं मेनका
मॉडलिंग में अपना करियर बनाने वाली मेनका की मुलाकात जब संजय की मां इंदिरा से हुई तो मेनका उस समय डरी-सहमी थीं। 1974 में संजय गांधी ने अपनी मां से मेनका की मुलाकात करवाई। जब दोनों का सामना हुआ तो इंदिरा ने मेनका से कहा, संजय ने तुम्हारा परिचय नहीं कराया, कुछ अपने बारे में बताओ। जिसके बाद मेनका ने अपने बारे में बताना शुरू किया। लेकिन उन्होंने अपनी मॉडलिंग वाली बात नहीं बताई। उन्हें लगा कि यह बताना सही नहीं रहेगा।
दोस्त के घर शादी के बंधन में बंधे
समय के साथ-साथ मेनका और संजय का रिश्ता मजबूत होता जा रहा था। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन जब इस बात का पता इंदिरा गांधी को चला तो उन्होंने तुरंत मना कर दिया, क्योंकि वह चाहती थीं कि मेनका 18 साल की हो जाएं। 29 जुलाई 1972 को दोनों परिवार की सहमति के बाद मेनका और संजय ने खास महमानों के बीच सगाई की। 23 सितंबर 1974 में दोनों शादी के बंधन में बंध गए। संजय के दोस्त मोहम्मद यूनुस के घर यह शादी हुई। इंदिरा गांधी ने इस दौरान मेनका को 21 साड़ियां दीं और नेहरू द्वारा जेल में बुनी सोने की साड़ी भी दी।