नोएडा सिटी सेंटर और वैशाली से गुड़गांव या फरीदाबाद की ओर जाने व वहां से आने वाले यात्रियों को मंडी हाउस से केंद्रीय सचिवालय के बीच नए ट्रैक में सफर करने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
डेडलाइन खत्म होने के बाद भी इस ट्रैक पर मंडी हाउस इंटरचेंज का काम पूरा नहीं हुआ है। हालांकि ट्रैक तैयार है, लेकिन स्टेशन, प्लेटफॉर्म से बाहर आने वाली सीढ़ियों व रैंप का काम अभी चल रहा है।
फेज तीन के तहत दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन ने मंडी हाउस से केंद्रीय सचिवालय के बीच ट्रैक का काम दिसंबर 2013 में पूरा कर लिया था, लेकिन निर्माणकार्य कंपनी मार्च खत्म होने के बाद भी अपना काम पूरा नहीं कर सकी है। डीएमआरसी ने दिसंबर में ट्रायल रन शुरू कर दिया था।
सूत्रों के मुताबिक डीएमआरसी ने कंपनी को 31 मार्च तक काम पूरा करने का निर्देश दिया था, लेकिन बुधवार को मंडी हाउस व जनपथ मेट्रो स्टेशन के बाहर काम चल रहा था। डीएमआरसी ने मार्च में यात्रियों को नए ट्रैक की सुविधा देने का वादा किया था, लेकिन निर्माणकार्य कंपनी के काम में देरी के साथ ही सेफ्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के लिए सेफ्टी ट्रायल न होने से सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।
बताया गया है कि अगर डीएमआरसी को इस ट्रैक पर एक महीने पहले भी सेफ्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट मिल जाता तो भी मार्च तक लाइन शुरू नहीं हो सकती थी। सूत्रों के मुताबिक, आए दिन यात्री इंटरचेंज शुरू होने के बारे में डीएमआरसी की हेल्पलाइन व मेट्रो स्टेशनों में जानकारी मांगते हैं, लेकिन इसका जवाब डीएमआरसी प्रबंधन के पास भी नहीं है।
मेट्रो रेल कमिश्नर को सेफ्टी रन के तहत आखिरी सुरक्षा जांच में फायर, सेफ्टी, अलार्म, ट्रैक, ट्रेन आदि की जांच कर डीएमआरसी को सेफ्टी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जारी करना होता है। सर्टिफिकेट जारी होते ही नया ट्रैक यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। डीएमआरसी के अधिकारियों के मुताबिक, मेट्रो रेल कमिश्नर की सुरक्षा जांच से पहले प्रबंधन पूरी तैयारियां कर चुका है।
दिल्ली फायर सर्विस ने भी सेफ्टी क्लीयरेंस दे दिया है। उम्मीद है कि सुरक्षा जांच के दौरान किसी प्रकार की कमी नहीं आएगी। मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के ऊपर स्कूल ऑफ ड्रामा की ओर लिफ्ट, स्वचालित सीढ़ियां, रैंप आदि का निर्माण कार्य आखिरी चरण में हैं। इंटरचेंज सुविधा शुरू होते ही इस स्टेशन पर 70 हजार तक नए यात्री जुड़ जाएंगे।