चार साल के अगवा बेटे पीयूष वैद्य की तलाश में पांच साल से दर-दर की ठोकरें खा रहे फरीदाबाद के एनआईटी-5 निवासी राकेश वैद्य ने 20 जनवरी 2015 को मुख्यमंत्री से इस उम्मीद के साथ शिकायत की थी कि पुलिस उसका सुराग लगाने के लिए कुछ न कुछ जरूर करेगी, पर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। पुलिस ने मुख्यमंत्री को अब तक की अपनी कार्रवाई का चिट्ठा भेजकर पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद पीड़ित ने दोबारा सीएम से फरियाद की है।
ज्ञात हो कि एफ ब्लॉक एनआईटी-5 निवासी कारोबारी राकेश वैद्य के चार वर्षीय बेटे पीयूष वैद्य का 20 जनवरी 2010 को घर के पास से शाम सात बजे अपहरण हो गया था। उन्होंने टाउन नंबर-5 में इसकी रिपोर्ट भी दर्ज कराई। पीड़ित ने पांच साल से पुलिस कमिश्नर से लेकर डीजीपी और मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक सबसे फरियाद कर बेटे को तलाश में मदद मांगी, लेकिन बेटे का सुराग नहीं लग पाया।
राकेश वैद्य ने इस साल सीएम विंडो में शिकायत कर बेटे की तलाश के लिए पुलिस को निर्देश देने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने पुलिस कमिश्नर से जांच रिपोर्ट मांगी। एनआईटी के सहायक पुलिस आयुक्त रामेश्वर लांबा ने 130 लोगों से पूछताछ, मोबाइल को सर्विलांस पर लेकर जांच और संदिग्धों के पॉलिग्राफी टेस्ट कराने की रिपोर्ट बनाकर मुख्यमंत्री और पीड़ित को भेज दी। अब राकेश ने दोबारा सीएम विंडो में शिकायत दी है।
11 जिलों की पुलिस से संपर्क का दावा
सहायक पुलिस आयुक्त ने सीएम को भेजी रिपोर्ट में दावा किया है कि उन्होंने एसपी पलवल, रेवाड़ी, गुड़गांव, यूपी के मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, बुलंदशहर, मथुरा और राजस्थान के भरतपुर व अलवर एसपी को अपहृत पीयूष की सीडी बनाकर भेजी और तलाश में मदद मांगी थी। यही नहीं, अपहर्ताओं की गिरफ्तारी और सुराग देने वालों को 50,000 हजार रुपये देने की घोषणा भी की गई है। हरियाणा पुलिस की वेबसाइट पर भी पीयूष की जानकारी अपलोड की गई है।
दो बार इस्तेमाल हुआ मोबाइल नंबर
पीड़ित राकेश वैद्य ने बताया कि घटना के दिन ही रात 8:30 बजे मोबाइल पर 9811040587 नंबर से 17 पेटी फिरौती मांगी गई। पुलिस का दावा है कि इस नंबर का फिरौती के लिए केवल दो बार ही उपयोग किया गया था। मोबाइल सिम श्रुति इंटरप्राइजेज गाजियाबाद से एनपी अपार्टमेंट विकासपुरी दिल्ली निवासी कैलाश मिश्रा के नाम से ड्राइविंग लाइसेंस की फोटोकॉपी लगाकर लिया गया था। लाइसेंस पर पता बस्ती कॉलोनी, राहुलकला, सुंदरगढ़ उड़ीसा का पता था। पुलिस का कहना है कि जांच में कैलाश का लाइसेंस सही पाया गया, लेकिन कनेक्शन फार्म पर लगा फोटो किसी अन्य का था।
पुलिस कमिश्नर के आदेश पर मामले की जांच सीआईए सेक्टर-30 कर रही है। अभी इस मामले को बंद नहीं किया गया है। बच्चे के बारे में जो भी सुराग मिलता है, तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
- रामेश्वर लांबा, सहायक पुलिस आयुक्त एनआईटी