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जज से बोला आरोपी- साहब मैं महिला बनने वाला हूं, बताया पुरुषों में क्यों है दिलचस्पी

Wed, 25 Dec 2019 11:55 AM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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delhi high court - फोटो : PTI
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महिला सहकर्मी से छेड़छाड़ के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई को दौरान मंगलवार को कुछ ऐसा हो गया कि वकील और जज समेत वहां मौजूद सभी लोग भौंचक्के रह गए। छेड़छाड़ के आरोपी ने दलील दी कि वह महिला के साथ छेड़खानी कर ही नहीं सकता, क्योंकि बचपन से ही उसे पुरुषों में रूची है। आरोपी ने साफ कहा कि उसे महिलाओं में कभी कोई दिलचस्पी नहीं थी और वह अपना लिंग परिवर्तन करवा रहा है।

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पीड़िता के साथ उसके रिश्ते बहन जैसे थे। इसलिए वह उससे छेड़छाड़ नहीं कर सकता था। इसलिए उसके खिलाफ अक्तूबर 2016 में कनॉट प्लेस थाने में दर्ज एफआईआर को खारिज किया जाए। हालांकि आरोपी की ऐसी दलीलें सुनकर भी अदालत ने उसकी एफआईआर वापस लेने की याचिका को खारिज कर दिया।

महिला की वेशभूषा में पेश हुआ याची

याची महिलाओं की वेशभूषा में पेश हुआ और कोर्ट को बताया कि वह बचपन से जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें शारीरिक व मानसिक संरचना में विरोधाभास होता है। इससे पीड़ित शख्स अपनी शारीरिक बनावट के विपरीत आचरण करता है। 

वहीं पीड़िता को व्हील चेयर पर कोर्ट में पेश किया गया, क्योंकि वह मल्टीपल स्क्लेरोसिस से पीड़ित है और चलने फिरने में असमर्थ है। उसने आरोपी की बातें सुनने के बावजूद समझौता करने व एफआईआर वापस लेने से इंकार कर दिया। 

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पीड़िता की आपत्ति के बाद याचिका खारिज

न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने पीड़िता की आपत्ति के बाद याची के खिलाफ दर्ज एफआईआर खारिज करने से इंकार कर दिया। पीड़िता के वकील उमेश जोशी ने कहा कि उसकी मुव्वकिल ने पिछली तारीख पर एफआईआर खारिज की सहमति देने से इंकार किया था, लेकिन आरोपी ने पीड़िता की ओर से किसी अन्य वकील को पेश करवा दिया और उसके फर्जी दस्तखत भी कर दिये। इस मामले में समझौते की कोई गुंजाइश नहीं है। 

नोएडा की कंपनी में कार्यरत थे दोनों पक्ष
थाना कनॉट प्लेस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक आरोपी व पीड़िता 2014 में नोएडा की एक कंपनी में काम करते थे। कनॉट प्लेस में कंपनी की एक पार्टी के दौरान आरोपी ने पीड़िता से कथित तौर पर छेड़छाड़ की थी। उसने इसकी शिकायत संस्थान से कई बार की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई बल्कि उसे क्लीन चिट दे दी गई। 

निचली अदालत ने अगस्त में आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ की धारा में आरोप तय किये, लेकिन धमकी देने व अभद्र टिप्पणी देने के आरोप से मुक्त कर दिया था। कुछ दिन पहले हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में आरोपी को पुरुष बताया गया था।
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