दूतावास ने लिए 1.80 लाख रुपये
शमिया चौधरी ने कहा कि सरकार ने वादा किया था कि शव को बांग्लादेश मुफ्त में भेजा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दूतावास में हमसे 1.80 लाख रुपये लिए गए। मैं जानना चाहती हूं कि यह काम मुफ्त में क्यों नहीं किया गया। यह भी नहीं पता कि यह रकम वापस मिलेगी या नहीं, लेकिन हमसे पैसे क्यों मांगे गए, इसका जवाब मिलना चाहिए।
दिल्ली पुलिस से खुश है शमिया
उन्होंने बताया कि हादसे के बाद पुलिस ने उनके अधिकांश सामान उन्हें वापस दिला दिए हैं। इसके लिए उन्होंने पुलिस का आभार जताया। हालांकि, कुछ सामान अभी भी लापता है। उन्होंने कहा, “मुझे मेरा सामान पुलिस के जरिए वापस मिला, इससे मैं बहुत खुश हूं। हालांकि कुछ चीजें अभी भी नहीं मिली हैं, लेकिन बाकी सामान बरामद हो गया है।”
कमरा नंबर 302 में ठहरे थे पांच लोग
अग्निकांड की भयावहता को याद करते हुए शमिया भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि घटना के समय वह इमारत की तीसरी मंजिल पर कमरा नंबर 302 में थीं और वहां कुल पांच लोग मौजूद थे। सुबह करीब आठ बजे आग लगने के बाद हालात बेहद भयावह हो गए थे। शमिया ने कहा कि मुझे लगा कि मैं जिंदा नहीं बचूंगी। ऐसा महसूस हो रहा था कि अब मेरी मौत तय है और मैं इस दुनिया में नहीं रहूंगी। उस समय जो डर और बेबसी थी, उसे शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है।