हाईकोर्ट और यूपी के चीफ सेक्रेटरी के आदेश जिला प्रशासन और नगर निगम अधिकारियों के बीच फुटबाल बने हुए हैं।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने से पहले जांच की जिम्मेदारी न तो प्रशासन और न ही नगर निगम के अधिकारी लेने के लिए तैयार है।
इन दो विभागों की खींचतान के चलते शहर में दो हजार से ज्यादा प्रमाण पत्र अटक गए हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदक निगम दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं।
दरअसल, एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नवंबर 2014 में आदेश जारी किया था कि एक साल से ज्यादा पुराने मामलों में जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए नगर क्षेत्र में सिटी मजिस्ट्रेट और तहसील क्षेत्र में एसडीएम को जांच के लिए अधिकृत किया है।
ये अधिकारी आवेदनों की जांच कराकर नगर निगम को प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश देंगे। हाईकोर्ट के आदेशों के बाद इनका अनुपालन कराने के लिए शासन ने भी शासनादेश जारी किया था।
सिटी मजिस्ट्रेट आवेदनों पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी को जांच कराने के निर्देश दे रहे हैं। इन आवेदनों पर सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से पत्रांक नंबर भी दर्ज नहीं किया जा रहा।
उधर, हाईकोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का मामला मानते हुए निगम अधिकारी भी इन आवेदनों की जांच नहीं करा रहे हैं।
उनका कहना है कि जब तक जिलाधिकारी स्तर से लिखित आदेश नहीं होगा वे अपने स्तर से जांच नहीं करा सकते। ऐसे में नगर निगम के पांचों जोन के 2 हजार से ज्यादा आवेदन नगर निगम के कार्यालय में पड़े हुए हैं।
इन कालोनियों के आवेदन सबसे ज्यादा
वसुंधरा, वैशाली, इंदिरापुरम, कौशांबी, शालीमार गार्डन, राजेंद्र नगर, ब्रिज विहार, सूर्य नगर, चंद्रनगर, गोविंदपुरम, हिंडन विहार, नंदग्राम
मैं अपने स्तर से जांच नहीं करा सकता। जांच कराई तो यह हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होगा। इसके लिए जिलाधिकारी स्तर से कोई लिखित आदेश जारी हो तो जांच कराई जा सकती है।- डा.आरके यादव, नगर स्वास्थ्य अधिकारी