अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर करने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के वंशज इन दिनों मजबूरी व कठिनाई में दिन गुजार रहे हैं। बापू के तीसरे पुत्र रामदास गांधी के बेटे कनुभाई रामदास गांधी अपनी पत्नी शिवालक्ष्मी के साथ बदरपुर स्थित गुरु विश्राम वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
कोई संतान न होने के कारण इस वयोवृद्ध दंपति की देखभाल के लिए कोई नहीं है। जीवन की परिस्थितियां कहां से कहां ले जाएं इसका अंदाजा इस दंपति की जीवन यात्रा को सुनकर लगाया जा सकता है। अपने जीवन के आखिरी पड़ाव पर 87 वर्षीय कनुभाई व उनकी पत्नी शिवालक्ष्मी (85 वर्षीय) इस वृद्धाश्रम पहुंचे।
गर्मी से परेशान हो रहे इन खास मेहमानों के लिए आश्रम प्रबंधन ने न केवल अलग से कमरा खाली कराया बल्कि उसमें एसी भी लगाया। बदरपुर स्थित गुरु विश्राम वृद्ध आश्रम को जे.पी भगत चलाते हैं। आश्रम की प्रशासक श्वेता ने बताया कि यहां आने के लिए दंपति ने स्वयं ही संपर्क साधा था।
बीती आठ मई को कुछ लोगों के साथ गुजरात से यह लोग यहां आएं। हमारे पास स्थान की समस्या है और पहले से 123 बुजुर्ग रहते हैं। लिहाजा आश्रम के एकमात्र आईसीयू को उनके लिए खाली कर दिया गया। इस आश्रम में यह इकलौता कमरा है, जहां बिस्तर लगाया गया। उनकी मांग पर एसी की व्यवस्था भी की गई। इससे पहले दोनों गुजरात के साबरमती आश्रम में रह रहे थे। पासपोर्ट देखने के बाद इनकी पहचान होने पर इन्हें दिल्ली के वृद्धाश्रम में शरण दी गई।