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बैन के बावजूद राजधानी में 102 रुपए प्रति पैकेट बिक रही मैगी

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आप अगर चलते फिरते दक्षिण दिल्ली के पॉश माने जाने वाले वसंत विहार इलाके में चले जाएं तो वहां के दुकानदार आपका दिल खोलकर स्वागत करेंगे। ऐसा तब तक होगा जब तक कि आप उन्हें ये न बता दें कि आपको क्या खरीदना है।
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जैसे ही आपने उस पीले पैकेट की डिमांड की उनके चेहरे का रंग बदल जाता है और जब तक दुकानदार आपसे संतुष्ट न हो जाए वह उस खास पैकेट के होने की बात नहीं बताएगा।

अगर वह पहले से आपको जानता है तब ही उस पीले पैकेट को काली पॉलीथीन में डालकर आपको देगा। इस खास पीले पैकेट की बिक्री आजकल यहां के दुकानदार कुछ ऐसे ही करते हैं जैसे ड्रग्स की तस्करी।
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एक बार में केवल दो पैकेट ही बेचते हैं

हम यहां किसी स्मगलिंग की बात नहीं कर रहे बल्कि कभी आसानी से मिलने और दो मिनट में बनने वाली बैन हो चुकी मैगी के खरीद-बिक्री की बात कर रहे हैं।

मैगी का वो पैकेट जो बैन होने से पहले तक 10 रुपए में बिका करता था वो अब राजधानी में छिपे तौर पर 102 रुपए तक भी बिक रहा है। यानी अपने असली दाम के दस गुने से भी अधिक दाम में बिक रही है मैगी।

बैन हो चुकी मैगी को बेच रहे दुकानदारों का कहना है कि ये उनका आखिरी स्टॉक है‌ जिसे कोई हटवाने नहीं आया और ग्राहक खरीद रहे हैं इसलिए वो भी इसे बेच रहे हैं।

दिलचस्प बात तो ये है कि बैन हो जाने के बाद भी मैगी के बड़े फैन इसे खरीद रहे हैं। वहीं मैगी बेचने वाले दुकानदार भी एक बार में दो पैकेट से ज्यादा नहीं बेच रहे।
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'मैगी खाए बगैर हम भूखे मर जाएंगे'

मैगी को अपनी जिंदगी बताने वाली रश्मि कहती हैं कि उनके ही जैसे शहर में और भी मैगी लवर हैं।

वो कहती हैं कि हम इतने सालों से मैगी खा रहे हैं कि अब उसमें पाए गए लेड की हमें लत गई है। रश्मि तो यहां तक कहती हैं कि अगर उन्हें मैगी खाने से रोका गया तो वो भूखी मर जाएंगी।

वहीं जनकपुरी का एक दुकानदार बताता है कि वो काउंटर पर मैगी नहीं बेचता, बल्कि फोन पर ऑर्डर आने के बाद मैगी की डिलीवरी घर पर की जाती है। वो आगे कहता है कि वह किसी मुसीबत में नहीं पड़ना चाहता, ‌इसलिए अपनी दुकान पर मैगी नहीं बेचता।

(साभारः हिंदुस्तान टाइम्स)
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