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'मैं गिड़गिड़ाती रहती और वह हर बार मेरा रेप करता'

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मेडिकल स्टूडेंट स्तुती (काल्पनिक नाम) ने बताया कि जिसने मेरा रेप किया उसे मैं जानती थी। जिस रात उसने पहली बार मेरा बलात्कार किया उस रात मैंने ही उसे अपने पेइंग गेस्ट वाले कमरे पर बुलाया था। उसने मुझे कुछ बंगाली खाना बनाने को कहा था। मैंने उसके लिए खाना भी बनाया।
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मैं किसी को कुछ बता नहीं सकती थी क्योंकि मैं बिहार के एक छोटे से शहर से हूं। मेरे पिता दिल के मरीज हैं और मेरी एक छोटी बहन है जिसकी शादी की उम्र हो चुकी है। मुझे डर था कि अगर मैंने सच बोल दिया तो मेरा परिवा और मेरी बहन की जिंदगी बरबाद हो जाएगी।

इस घटना के बारे में मैंने अपने दो करीबी दोस्तों को बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी तुम्हारी बात पर भरोसा नहीं करेगा। अगर वह तुमसे शादी करने को तैयार हो जाए तो सब कुछ ठीक हो सकता है।
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लगभग डेढ़ साल तक वह ऐसे ही धोखा देता रहा। मैं इतना डरी हुई थी कि मैंने इस रिस्ते को चलने दिया। वह मेरे कमरे पर आता और किसी न किसी बहाने मेरा रेप करता। जब मैं बेहद बीमार थी और मुझे डेंगु हुआ था तब भी उसने मेरा बलात्कार किया।

स्टोरी व फोटो साभार: एचटी मीडिया
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रेप के बाद वह मुझसे पैसे भी लेता

जैसे-जैसे समय बितता गया उसने मेरा और भी शोषण करना शुरू कर दिया। उसने मुझसे पैसे मांगने शुरु कर दिए। उसने मुझे पूरी तरह कंगाल कर ‌दिया। मेरे पास अपने खर्च के लिए भी पैसे नहीं होते थे। अगर मैं उसे पैसे देने से इनकार करती तो वह मुझे पीटता भी था।

मुझे लगा कि मैं अंदर से मर गई हूं। अगर उसने मुझसे शादी नहीं की तो मैं कहां जाउंगी, किसे मुंह दिखाउंगी। मैंने उसे अपने कमरे में आने की इजाजत दी थी। ऐसे में कोई भी मेरी बात पर यकीन नहीं करता। हमारे समाज में लोग लड़कियों को ही दोष देते हैं।

मैं इतना मजबूर हो गई थी कि मैं उसके सामने गिड़गिड़ाने लगी थी। मैं उससे दया की भीख मांगती। अगस्त में वह अपने दो दोस्तों के साथ मेरे कॉलेज में आया और उसने भरी क्लॉस में मेरा बाल पकड़ कर मुझे क्लास के बाहर घसीटा। इस दौरान उसके दोस्त मुझे वेश्या कह मेरे ऊपर हंसते रहे।

कॉलेज में सब मेरा तमाशा देखते रहे

वहां भी किसी ने मेरा साथ नहीं दिया। कुछ लोग तो इसे एक ड्रामे की तरह देख रहे थे और मजे ले रहे थे। जब उसने मुझे ईंट से मारा तो कुछ छात्रों ने मेरी मदद की और हमें क्लास के अंदर ले गए।

उसके बाद मेरे सीनियर्स और प्रोफेसर्स ने मुझे पुलिस में जाने के लिए कहा। पुलिस स्टेशन जाते हुए मैंने एक गलती की। मैं बिना किसी वकील के वहां पहुंच गई थी।

पुलिस ने मुझसे कहा कि जो कुछ हुआ वह सब होता रहता है। वैसे भी गलती मेरी है क्योंकि मैंने ही उसे अपने घर में आने की इजाजत दी थी।

पुलिस ने कमजोर किया केस

जांच अधिकारी ने मुझसे लिखित में शिकायत देने को कहा। शिकायत में मैंन वही सब लिखा जो जांच अधिकारी ने मुझसे लिखने को कहा। बाद में मुझे पता चला कि वह एफआईआर काफी कमजोर थी।

चौंकाने वाली बात थी कि जिस जांच अधिकारी ने एफआईआर लिखी वह महिला थी और उन्होंने मुझसे कहा कि उसपर हमले की शिकायत उसे कॉलेज प्रशासन से करनी चाहिए।

बाद में मुझे पता चला कि मेरा बलात्कारी भी पुलिस के संपर्क में था। वह उसी दिन पुलिस स्टेशन गया और उसने बताया कि मेरी हालत ठीक नहीं है और मैं दिमागी तौर पर ठीक नहीं हूं।
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'मुझे धमकी भरे फोन आते हैं'

तब तक मैंने अपने घर वालों को कुछ भी नहीं बताया थ्‍ाा। कॉलेज में सब कुछ लोगों के सामने हुआ था लेकिन कोई भी मेरा साथ देने को तैयार नहीं था।

शिकायत के बाद जब उसे गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा जा रहा था तो उसने कहा कि मैं जल्द ही जेल से छूट कर बाहर आउंगा और फिर मैं तुझे देख्‍ा लूंगा। मेरा बलात्कार करने वाला बेल पर छूट कर बाहर आ चुका है।

मुझे और मेरे परिवार को धमकी भरे फोन आते हैं कि मैं अपनी एफआईआर वापस ले लूं। एक अकेली लड़की अब क्या कर सकती है मुझे नहीं पता।
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