इंडिया हैबिटेट सेंटर में नाटक का मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर में नाटक माधवी का मंचन हुआ। इसमें स्त्री विमर्श और पुरुष अहम की दास्तां बयां हुई। भीष्म साहनी की लिखित कालजयी नाटक माधवी पितृसत्तात्मक समाज और पुरुषों के अहम के टकराव के बीच पिसती स्त्री की व्यथा को बखूबी उजागर करता है। महाभारत के प्रसंग पर आधारित नाटक बताता है कि कैसे हजारों वर्षों के बाद भी स्त्री की स्थिति और उसके अधिकारों का संघर्ष समाज में जस का तस बना हुआ है।
कहानी के केंद्र में ययाति की पुत्री माधवी है, जिसे उसके पिता दानवीरता की प्रतिष्ठा पाने के लिए गालव को सौंप देते हैं। गालव अपने गुरु विश्वामित्र को गुरुदक्षिणा देने के स्वार्थ में माधवी का सौदा तीन अलग-अलग राजाओं से करता है। माधवी हर बार एक चक्रवर्ती पुत्र को जन्म देती है और अपने नवजात से अलग होने का संताप सहती है, लेकिन पुरुष समाज उसकी भावनाओं को समझने के बजाय उसे केवल एक वस्तु मानता है। नाटक के अंत में माधवी का स्वयंवर से बाहर निकल जाना पितृसत्ता के विरुद्ध उसके सशक्त विद्रोह को दर्शाता है।