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चिंताजनक: दिल्ली-NCR के युवाओं में बढ़ रही फेफड़ों की बीमारी, कारण हैं प्रदूषण, संक्रमण, धूम्रपान, वैपिंग

Mon, 23 Jun 2025 11:18 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष महाजन का कहना है कि बीते साल किए गए सीटी चेस्ट स्कैन से तीन में से एक मामलों में फेफड़ों में ऐसे बदलाव नजर आ रहे हैं जो पहले ज्यादातर बुजुर्गों में दिखते थे।
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वायु प्रदूषण - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण, वायरल सहित दूसरे संक्रमण व धूम्रपान के कारण युवाओं में फेफड़ों की बीमारी बढ़ रही है। दिल्ली के निजी लैब में हुई जांच के आंकड़े बताते हैं कि 20 से 30 साल के युवाओं में यह समस्या सबसे अधिक है। डॉक्टरों की सलाह पर करवाए गए सीटी स्कैन से पता चलता है कि युवाओं में फेफड़ों की शुरुआती बीमारियां बढ़ रही है। यदि समय पर इस रोग का इलाज न करवाया जाए तो भविष्य में समस्या जटिल हो सकती है।

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विशेषज्ञों की माने तो सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर मानक से कई गुना अधिक पहुंच जाता है। यह सीधे फेफड़ों पर असर डालता है। इसके अलावा कोरोना के बाद वायरल फीवर की समस्या बढ़ी है। संक्रमित होने के बाद मरीज लंबे समय तक बीमार रहता है। कई मामलों में वायरल एक से दो माह तक परेशान करता है। युवाओं में धूम्रपान करने की आदत भी बढ़ी है जो फेफड़ों की समस्याओं को बढ़ा रहा है।

चार हजार रिपोर्ट का हुआ विश्लेषण
वर्ष 2024 में किए गए 4 हजार से ज्यादा स्कैन में करीब 29 फीसदी मामलों में फेफड़ों की संरचना में बदलाव दिखा। इसमें ब्रोंकाइटिस, इम्फाइसीमा, फाइब्रोसिस और ब्रोंकियल वॉल मोटी होना सहित दूसरी समस्या दिखी।
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तीन में से एक में मिली समस्या
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. हर्ष महाजन का कहना है कि बीते साल किए गए सीटी चेस्ट स्कैन से तीन में से एक मामलों में फेफड़ों में ऐसे बदलाव नजर आ रहे हैं जो पहले ज्यादातर बुजुर्गों में दिखते थे। इनमें से कुछ बदलाव स्थायी होते हैं। इसमें ब्रोंकाइटिस और शुरुआती इम्फाइसीमा शामिल है। अगर समय रहते इन बदलावों को न पहचाना जाए तो आगे चलकर ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। समय पर स्क्रीनिंग करवाने से समस्या जल्द पकड़ में आ सकती है।
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