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सीलिंग-नोटबंदी के जरिए लोगों पर हुई 'सर्जिकल स्ट्राइक' पर होगा मतदानः पंकज गुप्ता

Wed, 24 Apr 2019 10:03 PM IST
राजेश सैनी डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पंकज गुप्ता (फाइल फोटो)
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भाजपा-कांग्रेस के हाई प्रोफाइल नेताओं के सामने आप के सामान्य चेहरों के सामने असामान्य चुनौती है। चुनौती एक बार फिर 2015 के विधानसभा चुनाव की सफलता को दुहराने की है। क्या आम आदमी पार्टी इसके लिए तैयार है? कुछ इसी तरह के सवालों के साथ हमारे संवाददाता अमित शर्मा ने आप के चांदनी चौक से प्रत्याशी पंकज गुप्ता से मुलाकात की। पेश है वार्ता के प्रमुख अंश- 

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पंकज जी, चांदनी चौक में आपके सामने भाजपा से हर्षवर्धन और कांग्रेस से जयप्रकाश अग्रवाल जी चुनाव लड़ रहे हैं। इस चुनौती के बारे में क्या कहेंगे? 
देखिये, हमने 2015 दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम चेहरों के साथ भाजपा-कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गजों को धूल चटाई है। हम इस बार भी वही सफलता दुहराने जा रहे हैं। इन हाई प्रोफाइल चेहरों ने दिल्ली को दिया क्या है? हर्षवर्धन जी पांच साल के बीच अपने पांच काम बता दें जो उन्होंने चांदनी चौक के व्यापारियों को दिया है तो मैं जानूं। अग्रवाल जी लंबे समय तक दिल्ली के शीर्ष पदों पर रहे हैं। एक बार जाकर इनके गृहक्षेत्र की हालत देख लीजिये। जनता को नाम नहीं, काम चाहिए जो हमने किया है।
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क्या आप मानते हैं कि 2015 के अरविंद केजरीवाल आज भी जनता में उतने ही विश्वसनीय हैं?  
यह तय करने का अधिकार सिर्फ जनता को है। 23 मई को पता चलेगा कि अरविंद केजरीवाल की विश्वसनीयता कम हुई है या नरेंद्र मोदी की। अगर मोदी वेव आज भी बरकरार है तो भाजपा को नामांकन के अंतिम दिन तक अपने लिए प्रत्याशी क्यों तलाशने पड़े?  मोदी के नाम पर ही वोट पड़ना है तो उम्मीदवारों को बदलने की जरुरत क्यों पड़ी?  

दिल्ली की जनता राष्ट्रीय सोच रखती है। अगर सर्जिकल स्ट्राइक और सुरक्षा जैसे राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव हुए तो क्या आप को नुकसान होगा? 
बिल्कुल सर्जिकल स्ट्राइक पर चुनाव होगा। लेकिन उस सर्जिकल स्ट्राइक पर चुनाव होगा जो भाजपा ने दिल्ली के व्यापारियों पर सीलिंग के माध्यम से किया है। लोगों के रोजगार खत्म हुए हैं, व्यापारियों की जिंदगी तबाह हो गई है। व्यापारियों पर नोटबंदी और जीएसटी की सर्जिकल स्ट्राइक हुई है। ऐसे लोगों का मतदान सर्जिकल स्ट्राइक पर नहीं, रोजी-रोटी के मुद्दे पर पड़ेगा। चांदनी चौक व्यापारियों का गढ़ है। एक बार जाकर उनके दिल का हाल जान लीजिये, समझ जाएंगे कि मतदान किस मुद्दे पर होने जा रहा है।

आपने दिल्ली को पूर्ण राज्य दिलाने को अपना सबसे प्रमुख मुद्दा बना रखा है?  लेकिन जनता की इस मुद्दे पर बहुत ठंडी प्रतिक्रिया है? आपने अपने दिल्ली मॉडल पर वोट क्यों नहीं मांगा?  
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हम अपने कैंपेन में लोगों को यही बात समझा रहे हैं। हमने दिल्ली मॉडल में लोगों को बहुत कुछ दिया है, लेकिन अगर हमारे कामों में अड़ंगा न लगाया गया होता तो हम दिल्ली की तस्वीर बदल चुके होते। हम बता रहे हैं कि आधी ताकत से अगर हम इतना कर सकते हैं तो पूरी ताकत होने के बाद दिल्ली के बच्चों को इंटरनेशनल क्लास की शिक्षा, खेलने की सुविधा दे सकते हैं।

कांग्रेस के साथ आपका गठबंधन होता तो क्या परिणाम बेहतर नहीं होता?  
बिल्कुल मदद मिलती। हमारे नेताओं की लाख कोशिश के बाद भी अगर वो गठबंधन के लिए तैयार नहीं हुए तो इसमें आप क्या कर सकती है। फिलहाल, अब हम चुनाव जीतने की बात कर रहे हैं। जनता को जागरुक कर रहे हैं कि कांग्रेस को वोट देने का मतलब भाजपा को जिताना है। जनता पर भरोसा है। वह किसी भी पार्टी के नेताओं से ज्यादा समझदार है।

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