आम चुनावों में जनादेश हासिल करने के लिए 2014 में प्रत्याशियों को शिक्षित राज्यों में अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ेगा।
ये बात 2009 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालते ही साफ हो जाती है। पता चलता है कि यूपी, बिहार और झारखंड के मुकाबले केरल, मिजोरम और दिल्ली जैसे राज्यों में प्रत्याशियों को जीत के लिए करीब-करीब दोगुने वोट हासिल करने पड़े।
यह तथ्य भी सामने आया कि शिक्षित राज्यों में मतदाताओं की जागरूकता को देखते हुए प्रत्याशी को ज्यादा पसीना बहाना पड़ता है।
16 फीसदी वोट से जीते थे ये सांसद
आंकड़े बताते हैं कि 2009 लोकसभा आंकड़ों के मुताबिक केरल, मिजोरम और दिल्ली में जीत के लिए जरूरी वोटों का औसत क्षेत्र के कुल मतदाताओं के 30 फीसदी से अधिक रहा।
वहीं, कम साक्षरता वाले राज्य झारखंड, यूपी और बिहार में ये प्रतिशत महज 18 फीसदी के करीब था। आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में प्रत्याशियों की जीत का औसत कुल मतदाताओं का 17.88 फीसदी रहा, तो केरल में औसत 35.84 फीसदी वोट पाकर ही उम्मीदवार संसद पहुंच पाए।
उत्तर प्रदेश में होने वाले कम मतदान का नतीजा है कि यहां के 60 सांसद 20 फीसदी से भी कम वोट पाकर 2009 में संसद पहुंच गए। गौतमबुद्ध नगर के सांसद सुरेंद्र नागर की बात करें, तो 16.13 फीसदी वोटों ने ही उन्हें जीत दिला दी थी।
प्रमुख राज्यों के चुनावी आंकड़े
राज्य ------साक्षरता प्रतिशत-----वोटों का औसत
केरल------------93.91-----------------35.84
मिजोरम---------91.58----------------33.97
दिल्ली-----------86.34---------------29.74
महाराष्ट्र----------82.91----------------22.61
यूपी-------------69.72----------------17.88
बिहार-----------63.82----------------17.77
झारखंड---------67.63----------------16.91
(आंकड़े कुल वोटरों के अनुपात का प्रतिशत हैं।)