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केस हारना या वापस लेना, आरोप झूठे होने का सबूत नहीं : कोर्ट

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- पति की गंभीर बीमारी के कारण महिला ने वापस ली चेक बाउंस की शिकायत, आरोपी की हर्जाने की मांग अदालत ने ठुकराई
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। किसी मुकदमे का नतीजा शिकायतकर्ता के पक्ष में न आना या परिस्थितियों के चलते शिकायत वापस ले लेना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि लगाए गए आरोप झूठे या मनगढ़ंत थे। कड़कड़डूमा कोर्ट ने एक चेक बाउंस मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी कह। कहा कि आरोप साबित न कर पाना और बिना किसी आधार के मुकदमा दायर करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ट्विंकल वाधवा की अदालत ने आरोपी आनंद पाल मलिक की उस पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने शिकायतकर्ता रेनू गुप्ता से हर्जाना दिलाए जाने की मांग की थी। अदालत ने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें हर्जाने की मांग को पहले ही खारिज किया जा चुका था।
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मामला रेनू गुप्ता की ओर से आनंद पाल मलिक के खिलाफ दायर चेक बाउंस शिकायत से जुड़ा था। शिकायतकर्ता ने अदालत में बताया था कि संबंधित लेन-देन की पूरी जानकारी उनके पति को है और वही मुकदमे की पैरवी कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान रेनू गुप्ता ने आरोपी को जानने से इन्कार कर दिया। इसी बीच मुकदमे की पैरवी कर रहे उनके पति गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। आखिरकार 5 नवंबर 2024 को रेनू गुप्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली। शिकायत वापस लिए जाने के बाद आरोपी ने अदालत का रुख किया और शिकायतकर्ता पर भारी हर्जाना लगाए जाने की मांग की।
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