राजधानी दिल्ली की सात सीटों पर भले ही डेढ़ सौ प्रत्याशी मैदान में हों, लेकिन चर्चा केवल 21 उम्मीदवारों की ही हो रही है।
यहां मतदाता ही नहीं प्रत्याशी भी दबी जुबान में लड़ाई मोदी व केजरीवाल के नाम से जोड़ रहे हैं। हालांकि, कांग्रेसी सांसद यहां अपनी छवि व विकास कार्य के नाम पर वोट मांग रहे हैं।
मोदी बनाम केजरीवाल की इस लड़ाई में सबसे फायदा या नुकसान दोनों ही कांग्रेस के खाते में जाना तय माना जा रहा है।
ये रहे योद्घा, कौन मारेगा मैदान
चांदनी चौक सीट पर केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल, उत्तर पूर्वी दिल्ली में आठवां लोस चुनाव लड़ रहे जेपी अग्रवाल, पूर्वी दिल्ली में हैट्रिक के लिए उतरे संदीप दीक्षित, पश्चिम दिल्ली में पार्षद से सांसद तक का सफर तय करने वाले महाबल मिश्रा, उत्तर पश्चिम दिल्ली से केंद्रीय मंत्री कृष्णा तीरथ और नई दिल्ली में पूर्व केंद्रीय मंत्री व कांग्रेस के महासचिव अजय माकन मैदान में हैं।
वहीं, दक्षिण दिल्ली से दूसरा चुनाव लड़ रहे रमेश कुमार को पूर्व सांसद व बड़े भाई सज्जन कुमार का सहारा है। इनके मुकाबले में भाजपा से पहली बार मैदान में उतरे महेश गिरी, प्रवेश वर्मा, डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. उदितराज, मीनाक्षी लेखी और दूसरा चुनाव लड़ रहे मनोज तिवारी व रमेश बिधूड़ी हैं।
मुस्लिम वोट तय करेंगे AAP-बीजेपी की किस्मत
आम आदमी पार्टी के राजमोहन गांधी, प्रो. आनंद कुमार, आशुतोष, आशीष खेतान, कर्नल देवेंद्र सहरावत, जनरैल सिंह व राखी बिडलान में से चार किसी भी तरह का पहला चुनाव लड़ रहे हैं। लोस चुनाव लड़ने का अनुभव सिर्फ राजमोहन गांधी को है।
मंगलवार को चुनाव प्रचार का अंतिम दिन है। ऐसे में हर जगह चुनावी चर्चा जोर पकड़ रही है। रणनीतिकारों का कहना है कि मुस्लिम व दलित वोट निर्णायक बनेंगे। चर्चा इस बात की है कि अगर मुस्लिम ‘आप’ का बटन दबाते हैं तो रिजल्ट बिल्कुल अलग आएगा। जबकि कांग्रेस की तरफ जाते हैं तो भाजपा के पक्ष में परिणाम नजर आएंगे। लड़ाई दलित मतदाताओं को खींचने की भी है।