उन्होंने अदालत से कहा कि कृपया वह पैम्फलेट देखें जो वे ले जा रहे थे। उन्होंने हमारे प्रधानमंत्री को लापता व्यक्ति के रूप में दिखाया है। उसमें फोटो भी है और उन्हें खोजने वाले को स्विस बैंक से इनाम देने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री दुनिया में हमारे प्रतिनिधि है, लेकिन उन्हें घोषित अपराधी की तरह लापता दिखाया गया है। इससे पता चलता है कि वे क्या करने की कोशिश कर रहे थे।
श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह से संसद पर सुनियोजित हमले की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस हिरासत की आवश्यकता है। जांच के दौरान अन्य लोगों की भी भूमिका की जांच की जानी है। इसके साथ ही अन्य देशों और अन्य आतंकवादी संगठनों के साथ उनके संबंध की भी जांच की जानी है, क्योंकि ऐसी भाषा सामान्य व्यक्ति नहीं लिख सकता।
एपीपी ने अदालत से यह भी कहा कि इस मामले में आईपीसी एवं गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला संसद के सुरक्षा उपनिदेशक की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। एपीपी ने कहा कि चारों आरोपियों का अधिकार केवल गैलरी तक ही सीमित था। लेकिन वे गैलरी से उस ओर कूद पड़े जहां सांसद चर्चा कर रहे थे और सत्र लाइव था। इससे संसद की कार्यवाही में व्यवधान पड़ गया।
उन्होंने कहा सभी आरोपी सेल की जांच टीम को रटे-रटाए जवाब दे रहे हैं। आरोपियों ने सवालों के जो जवाब दिए, उन्हें सुनने के बाद ऐसा लगता है कि उन्होंने पहले से ही तैयारी कर रखी थी कि पकड़े जाने पर पुलिस जब उनसे पूछताछ करेगी तो उन्हें क्या जवाब देना है।
उन्होंने कहा 2001 के संसद आतंकवादी हमले की बरसी पर एक बड़े सुरक्षा उल्लंघन में दो आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए, कनस्तरों से पीला रंग का धुआं निकाला और पकड़े जाने से पहले नारे लगाए। लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों - अमोल शिंदे और नीलम देवी ने भी संसद परिसर के बाहर तानाशाही नहीं चलेगी चिल्लाते हुए कनस्तरों से रंगीन गैस का छिड़काव किया। ऐसे में पूछताछ के लिए 15 दिन का रिमांड प्रदान किया जाए।
अदालत ने इसके बाद चारों आरोपियों को सात दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया और कहा कि जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया जा सकता है। इस मामले में सागर शर्मा एवं मनोरंजन डी. को तब गिरफ्तार किया गया था, जब वे लोकसभा के सार्वजनिक गैलरी से कूद गए थे। उस समय शून्यकाल चल रहा था। वहीं संसद के बाहर से पीली गैस छोड़ने वाले अमोल शिंदे और नीलम देवी को गिरफ्तार किया गया था।
लोकतंत्र के मंदिर पर 22 साल पहले हुआ था हमला
देश के लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर पर 22 साल पहले 13 दिसंबर को आतंकी हमला हुआ था। कार सवार पांच आतंकी सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर संसद भवन परिसर में घुस गए थे। हथियारों व गोला-बारूद से लैस आतंकियों ने कार से उतरते ही ताबड़तोड़ गोलियां चलाना शुरू कर दिया था। इससे संसद भवन के सुरक्षाकर्मियों सहित कुल नौ लोग शहीद हो गए थे।