राजधानी में इस बार 10,415 बेघर मतदान करेंगे। बीते लोकसभा चुनाव की तुलना में 30 प्रतिशत मतदाता बढ़े हैं। पिछले चुनाव में करीब आठ हजार बेघर मतदाता थे।
इससे पहले वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली में 7,032 बेघर थे। वर्ष 2019 के लोस चुनाव की तुलना में इस बार 2,400 बेघर मतदाता बढ़े हैं। निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बेघर मतदाताओं का नाम सूची में शामिल नहीं हो पाता है।
इस वजह से बीएलओ सर्वे कर बेघर मतदाताओं की सूची तैयार करते हैं। दो-तीन बार सर्वे किया जाता है। इस दौरान बेघर व्यक्ति यदि एक ही जगह पर लगातार रहते मिलते हैं तो उन्हें उस क्षेत्र का निवासी मान लिया जा जाता है और फिर मतदाता पहचान पत्र बनाया जाता है।
मजबूरी में बेघर खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे फुटपाथ पर, फ्लाइओवर के नीचे तो रैन बसेरों में रहने को विवश हैं। इन बेघरों को मतदान का मौका मिलेगा।
बेघर मतदाताओं का सर्वे कराकर मतदाता पहचान पत्र बनाया गया है। इस तरह लोकतंत्र के महापर्व में बेघरों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, चुनाव आयोग की ओर से इन्हें मतदान के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।