ऐसे में चुनाव के दौरान अपने कार्यकर्ताओं को चार्ज करने के लिए पार्टी ने तीन सीटों पर अपने विधायकों को उतार दिया। सोमनाथ और कुलदीप पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से हैं। सहीराम 2014 से पार्टी के साथ हैं। पार्टी मान रही है कि इससे उसके आम कार्यकर्ताओं में भरोसा बना रहेगा कि वह भी आप में ऊंची छलांग लगा सकते हैं।
मुस्लिम व पंजाबी उम्मीदवार को नहीं मिली जगह
आप ने अपनी लिस्ट में मुस्लिम समुदाय को नजरअंदाज किया है, जबकि इनकी आबादी करीब 12 फीसदी है। वहीं, पंजाबी समाज भी जगह पाने में नाकाम रहा। पार्टी का कहना है कि जिताऊ उम्मीदवारों पर दांव लगाया गया है। टिकट देने की पात्रता यही रही है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण भी साधने की कोशिश
दिल्ली में पूर्वांचली वोटर की संख्या करीब एक तिहाई है। आप ने पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले दो उम्मीदवार उतारकर इस समुदाय पर निशाना साधा है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी आप ने इसी तरह का प्रयोग किया था। इसमें करीब 12 उम्मीदवार पूर्वांचल से ताल्लुक रखने वाले थे। नतीजतन आप यहां से जुड़े वोटरों को हक में खींचने में कामयाब भी रही थी। पार्टी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में भी यह रणनीति काम करेगी।
वहीं, दिल्ली में करीब 17 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति से है। बीते दो विधानसभा चुनावों में एससी वोटर आप के साथ गया था। दिल्ली की सभी 12 आरक्षित सीटें आप के पास हैं। लोकसभा चुनाव में इसी रणनीति पर काम किया गया है। समझौते में इकलौती आरक्षित उत्तर-पश्चिमी सीट कांग्रेस के खाते में जाने के बावजूद कुलदीप को उम्मीदवार बनाया गया है। गुर्जर समुदाय के सहीराम को टिकट देकर गुर्जर वोटरों को भी अपनी तरफ खींचने का प्रयास किया गया है।