सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के नेताओं ने आम आदमी पार्टी के नेताओं से आग्रह किया था कि अपने हिस्से की सीट पर अपने चुनाव चिन्ह का प्रचार-प्रसार किया जाए, लेकिन सभी सातों सीटों पर इंडिया गठबंधन के एक बैनर के तले चुनाव लड़ा जाए। सभी जगह उम्मीदवारों के पोस्टरों, होर्डिग्स व प्रेस विज्ञप्ति में उनको इंडिया गठबंधन का उम्मीदवार लिखा जाए। इसके अलावा दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेताओं के फोटो छपवाए जाएं। उधर आप नेता एक बैनर तले चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव चिन्ह की तरह अपनी पार्टी का ही बैनर उपयोग किया जाए।
प्रदेश कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि संजय सिंह को जमानत मिलने के बाद अब चुनाव लड़ने की रणनीति तय करने के लिए उनसे संपर्क साधा जाएगा। उम्मीद है कि वह उनकी भावना समझते हुए उनके सुझाव को अवश्य मान लेंगे। इसके अलावा चुनाव लड़ने के लिए संयुक्त समितियों का गठन करने का भी कार्य किया जाएगा। दोनों पार्टियों ने सीट बंटवारे के समय सभी सीटों पर संयुक्त समितियां गठित करने का एलान किया था।
उधर कांग्रेस ने अपने हिस्से में आई तीनों सीटों पर अपने स्तर पर समितियां बनानी शुरू कर दी हैं। उसने सोशल मीडिया टीम बना दी है। इसके अलावा तीनों सीटों पर प्रचार के लिए क्षेत्रानुसार भी समिति बनाने की कवायद शुरू की है।
आप को तिनका का सहारा मिलने जैसा
लोकसभा चुनाव से पहले संजय सिंह को जमानत मिलना आम आदमी पार्टी के लिए डूबते को तिनका का सहारा मिलने जैसा है। अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया व संजय सिंह के जेल में बंद होने के कारण आप के पास स्टार प्रचारक का अकाल हो गया था। मगर अब संजय सिंह के बाहर आने से आप का यह अकाल काफी हद तक दूर हो सकता है। वह अच्छे वक्ता व प्रवक्ता है। उन्होंने सड़क के अलावा मीडिया व संसद में आप का जबरदस्त ढंग से पक्ष रखा है और भाजपा को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।