जानें क्या है एग्जिट पोल
दरअसल एग्जिट पोल एक तरह का चुनावी सर्वे होता है। मतदान वाले दिन जब मतदाता वोट देकर पोलिंग बूथ से बाहर निकलता है तो वहां अलग-अलग सर्वे एजेंसी और न्यूज चैनल के लोग मौजूद होते हैं। वह मतदाता से वोटिंग को लेकर सवाल पूछते हैं। इसमें उनसे पूछा जाता है कि उन्होंने किसको वोट दिया है? इस तरह से हर विधानसभा के अलग-अलग पोलिंग बूथ से वोटर्स से सवाल पूछा जाता है। मतदान खत्म होने तक ऐसे सवाल बड़ी संख्या में आंकड़े एकत्र हो जाते हैं। इन आंकड़ों को जुटाकर और उनके उत्तर के हिसाब से अंदाजा लगाया जाता है कि पब्लिक का मूड किस ओर है? मैथमेटिकल मॉडल के आधार पर ये निकाला जाता है कि कौन सी पार्टी को कितनी सीटें मिल सकती हैं? इसका प्रसारण मतदान खत्म होने के बाद ही किया जाता है।
2019 में कैसे थे एग्जिट पोल के नतीजे?
लोकसभा चुनाव 2019 के अधिकतर एग्जिट पोल ने भाजपा को सत्ता में आते हुए दिखाया था। एग्जिट पोल में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिलता दिखया गया था। वहीं खासतौर पर कांग्रेस के लिए एग्जिट पोल नतीजे बेहद निराशाजनक थे। 2024 की तरह 2019 में विपक्ष गठबंधन 'इंडिया' का अस्तित्व नहीं था बल्कि तमाम विरोध दल यूपीए के तहत चुनाव में उतरे थे। हालांकि, कुछ दल ऐसे भी थे जो किसी गठजोड़ का हिस्सा नहीं बने थे।
2019 में इतना रहा वास्तविक नतीजों और एग्जिट पोल के बीच अंतर
आजतक-एक्सिस एग्जिट पोल में दिल्ली में भाजपा को 6-7 सीटें मिली हुई बताई गई थीं। जबकि कांग्रेस को 0-1 सीट पर मिलने के लिए कहा गया था। 'आप' को इस पोल में 0 सीटें दिखाई गई थीं। न्यूज 24 -चाणक्य के एग्जिट पोल में दिल्ली में भाजपा को सभी सात सीटें दिखाई गई थी। इंडिया टीवी के सर्वे में दिल्ली में भाजपा सभी 7 सीटों पर जीत दिखाई थी। लेकिन परिणाम में दिल्ली की सातों सीट पर भाजपा ने बाजी मारी थी।
दिल्ली लोकसभा चुनाव में कितना हुआ मतदान?
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली मतदान में पिछड़ गई और सभी सातों लोकसभा सीटों के लिए 58.70 फीसदी वोटरों ने ही मतदान किया। यह पिछले दो चुनावों से भी कम रहा। शनिवार को छठे चरण के लिए छह राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों की 58 सीटों पर हुए 61.56% मतदान से भी कम रहा। राजधानी में सबसे कम 53.86% मतदान नई दिल्ली में हुआ, जबकि उत्तर-पूर्व दिल्ली में सर्वाधिक 62.87% वोटिंग हुई।
वोटिंग प्रतिशत कम, कांटे का हुआ सत्ता संग्राम
लोकसभा चुनाव में वोटिंग प्रतिशत कम होने से दिल्ली में सत्ता का संग्राम कांटे का हो गया है। वोटिंग में गिरावट आने से नतीजे नजदीकी होने के आसार हैं। राजनीति के जानकारों का कहना है कि जीत-हार का अंतर बड़ा नहीं होगा। मतदान की रफ्तार में घट-बढ़ व मतदाताओं की खामोशी से किसी अनुमान पर पहुंचना भी आसान नहीं है। इसमें फ्लोटिंग वोटर की भूमिका बड़ी हो गई है। दिल्ली की बाकी सीटों से ज्यादा वोटिंग होने से उत्तर-पूर्वी दिल्ली, पूर्वी दिल्ली व पश्चिमी दिल्ली की सीटों के नतीजे और भी दिलचस्प होंगे।
शनिवार शाम चुनाव आयोग ने जो 58.70 फीसदी वोटिंग का आंकड़ा जारी किया है, वह आखिरी नहीं है। इसमें अभी तीन से चार फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं, 2019 लोकसभा चुनाव में 60.6 फीसदी वोटिंग हुई थी। इससे पिछली बार की तुलना में वोटिंग प्रतिशत में गिरावट दो से तीन फीसदी के बीच की है।
वहीं, शनिवार पोलिंग स्टेशन पर मतदाताओं ने वोट विकास, सुरक्षा, रोजगार व महंगाई सरीखे मसलों पर डाले। बिजली-पानी समेत बेहतर बुनियादी सुविधाओं को भी मतदाताओं ने तवज्जो दी। इनमें से कुछ मुद्दे भाजपा तो कुछ इंडिया गठबंधन के हैं। राजनीति के जानकारों का मानना है कि वोट में गिरावट का सीधा मतलब है कि सत्ता व विपक्ष को लेकर मतदाता में ज्यादा उत्साह नहीं दिखा। ऐसे में स्वाभाविक है कि चिलचिलाती गर्मी में दल विशेष से राजनीतिक प्रतिबद्धता न रखने वाले वोटरों ने घर बैठना ठीक समझा।
एक जून को अमर उजाला App और amarujala.com पर देखें सभी एग्जिट पोल
Amar Ujala Mobile App और amarujala.com पर सभी एजेंसियों के एग्जिट पोल एक जगह मिलेंगे। जैसे ही अलग-अलग चैनलों और एजेंसियों के एग्जिट पोल आने शुरू होंगे उन सभी को उसी वक्त आप अमर उजाला पर देख सकेंगे।
सभी एग्जिट पोल का औसत यानी पोल ऑफ पोल्स में कहां किसकी सरकार बन सकती है। ये भी हम आपको बताएंगे। चुनाव के दौरान आने वाले ओपिनियन पोल से चुनाव बाद के एग्जिट पोल कितने बदले। किन राज्यों में किसे कितनी सीटें मिल सकती हैं। कहां मौजूदा सरकार पर लोग फिर से भरोसा जता सकते हैं। कहां सत्ता परिवर्तन हो सकता है? ये सब आपको Amar Ujala Mobile App और amarujala.com पर मिलेगा।