पिछले करीब चार दशकों में दिल्लीवालों ने एक लीक पर चलकर मतदान नहीं किया। 1980 के लोकसभा चुनाव से मतदाताओं ने कभी सातों सीटें एक पार्टी की झोली में डाल दीं।कभी अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों को सांसद बनाया। 2014 से पहले तक मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा के बीच ही रहा। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी भी अहम खिलाड़ी बनकर उभरी है।
दिल्ली में 1980 से अब तक के 10 लोकसभा चुनाव में चार बार सभी सीटें पार्टी विशेष के खाते में गई। इस मामले में कांग्रेस व भाजपा के बीच मुकाबला टाई रहा। कांग्रेस व भाजपा को दो-दो बार सातों सीटें एकमुश्त मिली हैं। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए 1984 के चुनाव में दिल्ली की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। इसके अलावा 2009 में सभी सीटें कांग्रेस के पास थीं। दूसरी तरफ 1999 व 2014 में भाजपा ने सातों सीटों पर जीत हासिल की थी। 2004 में कांग्रेस व भाजपा के बीच का मुकाबला 6-1 व 1998 में 1-6 का रहा। जबकि 1991 व 1996 में भाजपा ने बढ़त बनाई और कांग्रेस को 5-2 से शिकस्त दी। 1989 में चार सीट भाजपा, दो सीट कांग्रेस व एक सीट जनता दल को मिली थी। जबकि 1980 में एक छह सीट कांग्रेस को मिली।
2014 में आप केे आने के बाद मुकाबला त्रिकोणीय हुआ
बीते चार दशकों में 2009 के लोकसभा चुनाव तक दिल्ली का मुकाबला अमूमन कांग्रेस व भाजपा के बीच भी रहा। 2014 में पहली बार दिल्ली का सियासी जंग त्रिकोणीय हो गई। आप इस चुनाव में बड़ा खिलाड़ी बनकर उभरी और कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेलते हुए सभी सीटों पर रनर रही। मौजूदा चुनाव में एक बार फिर सभी सीटों का मुकाबला त्रिकोणीय है।
पिछले चार दशक की सियासी स्थिति
वर्ष भाजपा कांग्रेस अन्य
1980 1 6
1984 0 7
1989 4 2 1
1991 5 2
1996 5 2
1998 6 1
1999 7 0
2004 1 6
2009 0 7
2014 7 0