लोहियानगर ने जहरीले पानी के बारे में पर्यावरण विशेषज्ञ डा.विवेकराज सिंह का कहना है कि मामूली मात्रा 19-35 माइक्रोग्राम/लीटर से ही वाटर टॉक्सिटी इफेक्ट करने लगती है।
इससे हीमोलिसस बीमारी हो जाती है। किडनी और लीवर डैमेज होने लगते हैं। शुरुआत में इससे एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं। आरडब्ल्यूए के डा. वीके द्विवेदी के अनुसार क्रोमियम अकेले नहीं मिलता है।
जहां पर भूजल में क्रोमियम आक्साइड की मौजूदगी होती है, वहां पर आर्सेनिक-एआर, केडनियम-टीडी, लैड-पीबी और थैलेनियम-टीएच भी पाया जाता है।
ऐसे में इस क्षेत्र के पानी की गहन पड़ताल कराने की जरूरत है। इसका दुष्प्रभाव दूरगामी होगा और पीढ़ियों तक को प्रभावित करेगा।
अमर उजाला के अभियान पर बिछी थी पाइपलाइन
टीएचए, कड़कड़ मॉडल, महाराजपुर गांव और झंडापुर में रंगाई की फैक्ट्रियों के कारण भूगर्भ जल काला और पीला हो गया है। 2011 में जनमानस की इस बड़ी समस्या को लेकर अमर उजाला ने नियमित अभियान चलाया था।
अभियान के परिणाम स्वरूप हालांकि क्षेत्रों तक पेयजल लाइन बिछी। इसके बावजूद अब तक साफ पानी की सप्लाई पटरी पर नहीं आ सकी है।
2010 में जोरशोर से उठाया था मुद्दा
लोहियानगर मेरठ रोड इंडस्ट्रियल एरिया में बसा क्षेत्र है। इसी क्षेत्र में श्रीराम पिस्टन कंपनी भी स्थित है। वर्ष 2010 में अमर उजाला ने श्रीराम पिस्टन के केमिकल वाटर भूजल में मिलाने के खिलाफ अभियान चलाया था।
इसके बाद कई दिन तक फैक्ट्री सीज रही थी। बाद में कंपनी ने लोहियानगर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के साथ ही लोगों को दो नलकूप, ओवर हैड टैंक बनाकर दिए थे। अब इनका पानी भी प्रदूषित निकल रहा है।
ट्रॉनिका सिटी के आसपास का भूजल हुआ दूषित
लोनी की ट्रॉनिका सिटी के आसपास की औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले दूषित जल केकारण भी भूगर्भ जल दूषित हो गया है।
इसका ट्रॉनिका सिटी के आसपास बसी रिहाइशी कालोनियों केलोगों को झेलना पड़ रहा है। दूषित पानी को लेकर लोगों का रोष कई बार सड़कों पर दिखा, लेकिन प्रशासन के खोखले दावों व आश्वासन के अलावा लोगों को कुछ हासिल नहीं हुआ है।