ब्रजेश गोयल के मुताबिक चीनी सामानों के आयात न करने के निर्णय का सीधा लाभ स्थानीय व्यापारियों को हुआ है। कोरोना काल की मुश्किलों के बावजूद इस व्यापार से जुड़े लोगों को इस वर्ष अच्छा लाभ मिला है। राखियों को बनाने वाले कारीगरों, कच्चे माल सप्लायरों के साथ-साथ विक्रेताओं को भी देशी राखियां काफी सस्ती पड़ी हैं जिससे उन्हें भी इस बार ज्यादा लाभ हुआ है। इससे व्यापार के गति पकड़ने की राह आसान होती दिखाई पड़ रही है।
आगे भी बनी रह सकती है यह तेजी
भारतीय समाज के मुताबिक आने वाले चार महीने विभिन्न त्योहारों से भरे रहेंगे। इस काल में काफी व्यापारिक तेजी देखी जाती है। यह समय रक्षाबंधन से शुरू होकर दिवाली तक जाता है, लेकिन अब इसमें वर्ष के अंत में होने वाले समारोहों को भी जोड़ लिया जाता है। व्यापारियों का कहना है कि चीन के सामानों का उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा और इसका लाभ स्थानीय व्यापारियों को मिलेगा।