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चीन के बहिष्कार का स्थानीय व्यापारियों को मिला लाभ, रक्षाबंधन का अनुभव दिवाली में भी आजमाएंगे व्यापारी    

Thu, 30 Jul 2020 08:56 PM IST
Mohit Mudgal अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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रक्षाबंधन का त्यौहार अगस्त महीने के आसपास आता है, लेकिन इसके लिए व्यापारियों की तैयारी फरवरी-मार्च से ही शुरू हो जाती है। उसी समय से व्यापारी सामान मंगवाकर राखियों के निर्माण का कामकाज शरू कर देते हैं। लेकिन इस वर्ष पहले कोरोना के कारण और बाद में चीन से देश के तनावपूर्ण संबंधों के कारण पड़ोसी देश से रक्षाबंधन से जुड़ी चीजों का आयात नहीं किया जा सका।

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अनुमान है कि इससे चीन को लगभग दो हजार करोड़ रूपये का व्यापारिक नुक्सान हुआ है। इसका सीधा लाभ स्थानीय व्यापारियों को हुआ है और इस दौरान उनके व्यापार में काफी वृद्धि हुई है। व्यापारी संगठन रक्षाबंधन पर मिले इस अनुभव को दिवाली तक भी आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं जो व्यापार के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है।   
रक्षाबंधन का बड़ा बाज़ार  
भाई-बहनों के प्यार का प्रतीक त्यौहार रक्षाबंधन बाज़ार के लिए बड़ा सुनहरा अवसर भी लेकर आता है। अनुमान है कि इस त्यौहार के दौरान लगभग सौ करोड़ राखियां खरीदी जाती हैं। इनमें एक-एक  की कीमत दो-तीन रूपये से शुरू होकर हजारों रूपये तक होती है। धागों वाली या सस्ती राखियां भी खुले बाज़ार में दो-तीन रूपये से शुरू होकर काफी महंगी बिकती हैं तो वहीं, चांदी या सोने से जड़ी राखियां बेहद महंगी होती हैं। अनुमानत: दिल्ली में पांच हजार लोग राखी के व्यापार से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं, और अकेले रक्षाबंधन के आसपास इससे जुड़ा 50 करोड़ का कारोबार होता है।   

तैयार राखियों के साथ कच्चा माल भी 

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चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के चेयरमैन ब्रजेश गोयल ने कहा कि चीन के देशविरोधी व्यवहार का सीधा असर उससे होने वाले व्यापार पर पड़ा है। हर साल चीन से तैयार राखियों की भारी खेप देश के कोने-कोने से मंगाई जाती थी। इसके साथ ही राखियों को सजाने के लिए कच्चा माल जैसे फोम, चमकीली कड़ियां, मनके, सुनहले धागे, रेशम के कपड़े और अन्य सामान मंगवाया जाता था।

लेकिन जैसे ही केंद्र सरकार ने 59 चीनी एप्स को बंद किया, देश में चीन विरोधी माहौल बन गया। इसे देखते हुए व्यापारियों ने चीन से कोई व्यापार न करने का निर्णय लिया। इस निर्णय के कारण केवल रक्षाबंधन पर चीन को दो हजार करोड़ रूपये का नुकसान हुआ है। 

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लेकिन स्थानीय व्यापारियों को मिला मौका 

ब्रजेश गोयल के मुताबिक चीनी सामानों के आयात न करने के निर्णय का सीधा लाभ स्थानीय व्यापारियों को हुआ है। कोरोना काल की मुश्किलों के बावजूद इस व्यापार से जुड़े लोगों को इस वर्ष अच्छा लाभ मिला है। राखियों को बनाने वाले कारीगरों, कच्चे माल सप्लायरों के साथ-साथ विक्रेताओं को भी देशी राखियां काफी सस्ती पड़ी हैं जिससे उन्हें भी इस बार ज्यादा लाभ हुआ है। इससे व्यापार के गति पकड़ने की राह आसान होती दिखाई पड़ रही है। 

आगे भी बनी रह सकती है यह तेजी 
भारतीय समाज के मुताबिक आने वाले चार महीने विभिन्न त्योहारों से भरे रहेंगे। इस काल में काफी व्यापारिक तेजी देखी जाती है। यह समय रक्षाबंधन से शुरू होकर दिवाली तक जाता है, लेकिन अब इसमें वर्ष के अंत में होने वाले समारोहों को भी जोड़ लिया जाता है। व्यापारियों का कहना है कि चीन के सामानों का उनका विरोध आगे भी जारी रहेगा और इसका लाभ स्थानीय व्यापारियों को मिलेगा।   

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