अदालत ने आबकारी नीति मामले में शुक्रवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तीन अन्य के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के पूरक आरोपपत्र के संज्ञान पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया। सीबीआई ने पूरक आरोपपत्र में अर्जुन पांडे, बुची बाबू गोरंटला और अमनदीप ढाल को आरोपी बनाया है।
राउज एवेन्यू अदालत के विशेष न्यायाधीश एमके नागपाल ने आरोप पत्र का अध्ययन करने के बाद कहा कि वे 27 मई को आदेश सुनाएंगे। सीबीआई ने पूरक आरोप पत्र में आरोप लगाया है कि सिसोदिया ने शराब नीति के संबंध में टिप्पणी/ सुझाव मांगने की प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) के अध्यक्ष जाकिर खान के माध्यम से कुछ ईमेल गढ़े थे।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि सिसोदिया पूर्व आबकारी आयुक्त रवि धवन द्वारा 13 अक्टूबर, 2020 को सौंपी गई विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट की सिफारिशों से खुश नहीं थे। उन्होंने नए आबकारी आयुक्त राहुल सिंह को आबकारी विभाग के पोर्टल पर रिपोर्ट डालने का निर्देश दिया।
सिसोदिया ने आबकारी विभाग द्वारा तैयार कैबिनेट नोट के मसौदे को नष्ट कर दिया और 28 जनवरी, 2021 को हुई बैठक में मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा। कैबिनेट नोट के मसौदे में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और केजी बालकृष्णन, मुकुल रोहतगी, वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल, और अन्य की कानूनी राय प्राप्त की गई थी।