भारतीय रेल के ट्रैक पर चलने वाली निजी ट्रेनों का किराया यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं के आधार पर निजी ऑपरेटर तय कर सकते हैं। विमान की तर्ज पर पसंदीदा सीट, सामान, खान-पान की सेवाओं के लिए अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। इससे निजी कंपनियों को राजस्व का लाभ होगा वहीं रेलवे की कमाई भी बढ़ेगी।
रेल मंत्रालय ने अपने ट्रैक पर यात्री ट्रेनों को संचालित करने के लिए निजी संस्थाओं को आमंत्रित किया है। इसके तहत यात्रियों से शुल्क वसूलने का अधिकार निजी कंपनियों के पास हो सकता है। बताया जा रहा है कि जिस तरह से आईआरसीटीसी, ट्रेन तेजस चला रही है और इसके किराये में रेल मंत्रालय का कोई हस्तक्षेप नहीं है ठीक उसी तरह अन्य निजी ऑपरेटरों को भी यह अधिकार दिया जाएगा।
वित्तीय क्षमता के आधार पर बोली लगाने वाले, यात्रा किराये से लेकर अन्य सुविधा के लिए यात्रियों से शुल्क वसूल सकते हैं। रिक्वेस्ट फॉर कोटेशन (आरएफक्यू) के अनुसार उन्हें राजस्व प्राप्त करने के लिए स्वतंत्रता दी गई है। खानपान, बेड रोल, वाई-फाई, इंटरटेनमेंट के लिए यात्रियों को अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। विज्ञापन, ब्रांडिंग के साथ ट्रेन का नाम रखने में भी रेेलवे का हस्तक्षेप नहीं होगा। हालांकि रेलवे के अधिकारियों का मानना है कि प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण पर यात्रा किराया निर्धारित होगा। इससे यात्रियों को फायदा मिल सकता है।
उल्लेखनीय है कि रेलवे ने देश के 109 रूट पर 151 आधुनिक यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। इससे करीब 30 हजार करोड़ रुपये के निजी क्षेत्र का निवेश रेलवे में होगा। निजी कंपनी अपनी पसंद की ट्रेन निर्माण करा सकती हैं। यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलेंगी। इनमें 12 से 16 कोच होंगे।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार निविदा के लिए 21 जुलाई को रेलवे बोर्ड में बैठक होनी है। उधर, देश की पहली सेमी हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत को रेल ट्रैक पर उतरने में देरी संभव है। पिछले दिनों रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा था कि 10 जुलाई को 44 वंदे भारत एक्सप्रेस के लिए टेंडर जारी किया जाएगा, लेकिन लगातार तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। अब 21 अगस्त तक टेंडर प्रक्रिया टाल दी गई है।