ट्रेन संचालन में आने वाले समय में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। रेलवे अपनी नई समय-सारणी में न केवल ट्रेनों को रफ्तार देने की कवायद कर रहा है और इसके लिए ट्रेनों के समय में भी परिवर्तन करने जा रहा है। दरअसल इस साल रेलवे जीरो बेस्ड समय सारणी सिस्टम लागू करने जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार भारतीय रेलवे जीरो बेस्ड प्रणाली शुरू करने जा रहा है। इस प्रणाली में 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के बीच में 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेन नहीं चलेगी। इसका लाभ यह होगा कि कम गति से चलने वाली ट्रेन के पीछे तेज गति वाली ट्रेन की गति धीमी नहीं होगी।
इस सिस्टम के लागू होने के बाद कुछ स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव भी खत्म हो सकता है। इससे विभिन्न स्टेशनों पर रुकते जाने की एक बड़ी समस्या दूर होगी। हाल्ट स्टेशनों पर ट्रेनों का ठहराव भी खत्म हो सकता है। सभी ट्रेनों की टाइमिंग और फ्रिक्वेंसी बदल सकती है। कोरोना काल में चलने वाली विशेष ट्रेनों के साथ 151 निजी ट्रेनों को भी इसमें शामिल किया जा सकता है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अनलॉक में भी कुछ और ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जा सकता है। नई समय सारणी में मेंटीनेंस कॉरीडोर, शेड लाइन और मालगाड़ी के रूट का भी ख्याल रखा जाएगा। एक स्पीड की ट्रेनें एक साथ चलेंगी। पिछले कुछ सालों में एक-एक कर ट्रेनें जुड़ती गईं लेकिन रेलवे ट्रैक की क्षमता नहीं बढ़ी। एक ट्रेन रोक कर दूसरी, तीसरी ट्रेन चलाई जाती रही, अब ऐसा नहीं होगा।