मालब की फिरनी बनी बदहाली की पहचान,
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। विकास के दावों के बीच जिले के मालब गांव की सहजाद पट्टी के पास स्थित फिरनी वाला रास्ता व्यवस्था की उदासीनता की कहानी बयां कर रहा है। पिछले करीब डेढ़ साल से जर्जर पड़े इस लगभग 300 मीटर लंबे मार्ग पर बरसात के दौरान कीचड़ और बरसाती पानी का ऐसा कब्जा हो जाता है कि लोगों का पैदल निकलना भी किसी चुनौती से कम नहीं रहता। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और जलभराव के कारण ग्रामीण रोजाना परेशानी झेलने को मजबूर हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और ग्राम पंचायत अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं। यह फिरनी मार्ग केवल मालब गांव के लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि मुरादबास गांव को जोड़ने वाला भी प्रमुख रास्ता है। प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का इसी मार्ग से आवागमन होता है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार लोग फिसलकर चोटिल भी हो चुके हैं, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा लगातार बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते की बदहाली के कारण 50 से अधिक परिवारों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। इसी मार्ग पर स्थित काली वाली मस्जिद में नमाज अदा करने जाने वाले लोगों को भी कीचड़ और पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार नमाजी अपने कपड़े और जूते खराब होने के डर से दूसरे रास्तों का सहारा लेने को मजबूर हो जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार गांव के सरपंच और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। सड़क की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था आज तक नहीं हो सकी। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो बरसात के पूरे मौसम में हालात और भी भयावह हो जाएंगे।
ग्राम सचिव तौफीक का कहना है कि फिरनी वाला रास्ता पंचायत विभाग की ओर पक्का बना दिया गया था, लेकिन डेढ़ साल पहले जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा रास्ते को तोड़कर पाइपलाइन लाइन बिछाने का कार्य शुरू किया गया। जो अभी पूरा नहीं हुआ है। काम पूरा होने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा रास्ते को पक्का किया जायेगा।
डेढ़ साल से इसी परेशानी में जी रहे हैं। बरसात आते ही सड़क तालाब बन जाती है। कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
- यूनुस, ग्रामीण।
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यह रास्ता मुरादबास गांव को जोड़ता है। हर रोज सैकड़ों लोग गुजरते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को ग्रामीणों की परेशानी दिखाई नहीं देती।
- फते मोहम्मद, ग्रामीण।
काली वाली मस्जिद में नमाज पढ़ने जाने वाले बुजुर्गों और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। कई बार कीचड़ में फिसलने की नौबत आ जाती है।
- साहून, स्थानीय निवासी।
50 से ज्यादा घर इस रास्ते पर हैं। घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है। अगर जल्द सड़क नहीं बनी तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
- अतरबी, ग्रामीण।