केवीआईसी ने नौ नवंबर 2016 को जारी कर दिया था सर्कुलर
भारत सरकार ने 8 नवंबर 2016 को 1000 रुपये और 500 रुपये के नोटों का प्रचलन बंद कर दिया। केवीआईसी ने 9 नवंबर, 2016 को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें कहा गया था कि 1000 और 500 रुपये के पुराने नोट तत्काल प्रभाव से किसी भी बिक्री आउटलेट और प्रतिष्ठानों की ओर से स्वीकार नहीं किए जाएंगे। बाद में पता चला कि कुछ विमुद्रीकृत नोट खादी ग्रामोद्योग भवन (केजीबी), नई दिल्ली के खाते में अलग अलग तिथियों में जमा करवाए गए थे। इस मामले को तत्काल जांच और कार्रवाई के लिए केवीआईसी के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पास भेजा गया था। इसके बाद सीबीआई को भी सूचित करने के बाद 6 अप्रैल, 2017 को एक संयुक्त औचक निरीक्षण किया गया। प्रारंभिक जांच के बाद सीवीओ ने 17 अप्रैल, 2017 को केजीबी, नई दिल्ली के चार अधिकारियों और कर्मियों के निलंबन को स्थानांतरण की सिफारिश की। इनमें प्रबंधक एके गर्ग, सेल्स इंचार्ज अजय गुप्ता, सेल्समैन-3 (प्रमुख कैशियर) संजीव कुमार मलिक और एलडीसी प्रदीप यादव के नाम शामिल थे।
निष्पक्ष जांच के लिए अधिकारी-कर्मियों का कर दिया गया था तबादला
सीवीओ की सलाह के मुताबिक, चारों अधिकारियों व कर्मचारियों को तत्काल निलम्बित कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के लिए स्थानांतरित कर दिया गया। सीवीओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 10 नवंबर से 31 दिसंबर 2016 के दौरान दिल्ली में केजीबी बैंक खाते में कुल 22 लाख, 17 हजार रुपये की राशि जमा की गई। इनमें 500 रुपये के 2140 जबकि 1000 के 1147 नोट (अमान्य) 29 मई 2017 को केवीआईसी ने सीवीओ ने चार अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में सीबीआई को सूचित किया।
दो आरोपियों के खिलाफ सीबीआई दायर कर चुकी है चार्जशीट, मामला अदालत में लंबित
सीबीआई ने इस मामले की जांच में दो हेड कैशियर संजीव मलिक और प्रदीप यादव की संलिप्तता का खुलासा होने पर 14 जुलाई, 2017 को प्राथमिकी दर्ज की गई। सीवीओ की रिपोर्ट के आधार पर की गई सीबीआई की जांच में सामने आया कि इनमें से केजीबी, नई दिल्ली के खाते में केवल 17,07,000 रुपये के विमुद्रीकृत मुद्रा नोट जमा करवाए थे। सीबीआई ने केजीबी नई दिल्ली की प्रासंगिक नकद जमा पर्ची की जांच में निष्कर्ष निकाला कि कुल नकद जमा राशि 22,17,000 रुपये में से 5,10,000 रुपये वैध मुद्रा थी ना कि 500 और 1000 के प्रतिबंधित नोट। सीबीआई पहले ही दो आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है और मामला राउज एवेन्यू कोर्ट में लंबित है।
झूठे आरोप, भुगतने होंगे परिणाम
सूत्रों ने इस मामले में एतराज जताते हुए आप की ओर से लगाए आरोपों को झूठा करार दिया है। इस मामले में 1400 करोड़ रुपये का दावा किया गया था जबकि महज 17.07 लाख रुपये के मामले में दो पर सीबीआई की कार्रवाई चल रही है। यह महज एक कल्पना और मनगढ़ंत आरोपों के अलावा कुछ नहीं है और आदतन झूठ बोलने के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।