दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने मौजूदा आबकारी नीति में भ्रष्टाचार और नीति लागू करने में बरती गई अनियमितताओं के आरोप में 11 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। एलजी ने सतर्कता निदेशालय (डीओवी) की जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर कार्रवाई की है। उन्होंने पूर्व आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण (आईएएस) और तत्कालीन उपायुक्त आनंद कुमार तिवारी (दानिक्स) समेत सभी आरोपियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की विजिलेंस को मंजूरी भी दे दी है।
सभी अफसरों पर नई आबकारी नीति (2021-22) बनाने और उसे लागू करने में लापरवाही बरतने के साथ ही नियमों की अनदेखी और नीति के कार्यान्वयन में गंभीर चूक के आरोप हैं। इसमें अन्य बातों के साथ-साथ निविदा को अंतिम रूप देने में अनियमितताएं और चुनिंदा विक्रेताओं को टेंडर के बाद लाभ पहुंचाना भी शामिल है। आदेश के बाद दिल्ली सरकार मौजूदा आबकारी नीति को लेकर और दबाव में आ गई है। पिछले दिनों ही उपराज्यपाल सक्सेना ने नीति में पाई गई घोर अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपी थी। आर्थिक अपराध शाखा भी इस मामले की जांच कर रही है।
इनके खिलाफ कार्रवाई
तत्कालीन आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण, उपायुक्त आनंद कुमार तिवारी, सहायक आयुक्त पंकज भटनागर, नरेंद्र सिंह व नीरज गुप्ता, सेक्शन अधिकारी कुलजीत सिंह व सुभाष रंजन, सुमन, डीलिंग हेड सत्यव्रत भार्गव, सचिन सोलंकी व गौरव मान। कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया गया व अवैध रूप से खुदरा बिक्री की अनुमति दी गई। दो जोन के लिए लाइसेंस को एक ही निविदा नोटिस के अनुसार जारी किया गया था। यह प्रथम दृष्टया दर्शाता है कि अधिकारी बोलीदाताओं की जांच करने में विफल रहे।