दिल्ली सरकार ने न्यूनतम मजदूरी वृद्धि को लेकर बृहस्पतिवार को श्रमिक संवाद किया। श्रमिक संगठनों ने वृद्धि के लिए धन्यवाद भी दिया। शुक्रवार को उपराज्यपाल ने श्रम मंत्री गोपाल राय को मुलाकात का समय दिया और न्यूनतम मजदूरी वृद्धि की फाइल लौटा दी।
उसमें न्यूनतम मजदूरी वृद्धि फार्मूला तय करने के लिए गठित उच्चस्तरीय 13 सदस्यीय समिति को ही अवैध करार दे दिया। क्योंकि समिति गठन की मंजूरी उपराज्यपाल से नहीं ली गई थी।
फाइल लौटाने की सूचना पहले श्रम मंत्री और फिर उपराज्यपाल ने ट्वीट कर दी। ऐसे में समिति गठन, उसकी बैठकें, फिर से सिफारिश देने के अलावा कैबिनेट से फिर न्यूनतम मजदूरी वृद्धि को मंजूरी दिलानी पड़ेगी।
उपराज्यपाल शनिवार को दस दिन की विदेश यात्रा पर जा रहे हैं, मसलन न्यूनतम मजदूरी वृद्धि के लिए उनके वापस लौटने का इंतजार करना होगा। श्रम मंत्री गोपाल राय का तर्क है कि जो 13 सदस्यीय समिति है, उसी के नाम भेजे गए हैं।
सभी औपचारिकताएं फिर से पूरी करके सिफारिश आएगी। कैबिनेट मंजूर करके उपराज्यपाल को प्रस्ताव भेजेगी और वहां से स्वीकृति मिलने के बाद न्यूनतम मजदूरी वृद्धि की अधिसूचना जारी होगी।
जानिए क्या था प्रस्ताव
नजीब जंग और केजरीवाल
गोपाल राय ने उपराज्यपाल से मुलाकात के बाद बताया कि उपराज्यपाल ने फार्मूले से सहमति जताई है। समिति गठन को लेकर कुछ आपत्ति है, उसे दूर करके फाइल भेज देंगे।
शुक्रवार सुबह उपराज्यपाल ने आपत्ति के साथ फाइल वापस भेजी थी तो श्रम मंत्री ने दोपहर बाद श्रम विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई। बैठक में उपराज्यपाल की आपत्तियों को दूर करके शाम को फिर से सरकार ने प्रस्ताव की फाइल उपराज्यपाल के पास भेज दिया।
सरकार का कहना है कि कमेटी में वहीं 13 नाम भेजे गए हैं लेकिन साथ में श्रमिक संगठन समेत कुछ अन्य संगठनों के नाम वाली सूची भेजने की जानकारी भी सूत्रों ने दी है। ऐसे में उपराज्यपाल ने पुरानी समिति को मंजूरी मिलती है तो सरकार का काम आसान होगा।
मोदी के उपराज्यपाल ने लौटा दी फाइल
ऐसे दिन जब देश में 18 करोड़ मजदूर हड़ताल पर हैं, मोदी के उपराज्यपाल ने न्यूनतम मजदूरी की फाइल वापस कर दी। -अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री।
क्या था प्रस्ताव
अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 9568 रुपये से बढ़ाकर 14,052 रुपये, अर्धकुशल मजदूरों की 10,582 रुपये से बढ़ाकर 15,471 रुपये और कुशल मजदूरों की 11, 622 रुपये से बढ़ाकर 17,033 रुपये करने के प्रस्ताव को कैबिनेट में मंजूरी देकर उपराज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा था।