गैस कंपनियों से आने वाले सिलेंडरों में भी गैस कम होती है। नियम है कि यदि किसी सिलेंडर में 150 ग्राम गैस कम है तो उस सिलेंडर को वापस कंपनी में भेजा जाएगा। पर गैस एजेंसी संचालक ऐसा नहीं करते।
गैस एजेसी संचालक 300 से 500 ग्राम तक की कम गैस वाले सिलेंडरों को उपभोक्ताओं को दे देते हैं, जो यह नियम विरुद्घ है। विधिक माप विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक हरीश प्रजापति ने बताया कि उपभोक्ताओं को कम गैस देना कानून अपराध है।
गैस एजेंसियों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह प्रत्येक सिलेंडर को चेक करके, उसे तौले इसके बाद उपभोक्ताओं को दें। एजेंसी संचालक झंझट से बचने के लिए कम गैस वाले सिलेंडरों को ही दे देते हैं, जबकि उपभोक्ताओं से पूरी कीमत ली जाती है।
उन्होंने बताया कि बीते दिनों कई गैस एजेंसियों पर औचक निरीक्षण में यह बात सामने आई है। जहां शिकायत मिली है वह कड़ी चेतावनी दी गई है। यदि फिर भी एजेंसी संचालक नियम विरुद्घ कार्य करते हैं तब नोटिस जारी किया जाएगा।