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चुनाव से पहले ही परवान चढ़ा 'नेताजी' का सपना

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एक पुरानी कहावत है, पानी में मछली और बंटवारा पहले। इसे चरितार्थ कर रहे हैं भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेता। वह इस समय मंत्री-मंत्री खेल रहे हैं, जबकि अभी तक यह तय ही नहीं हो पाया है कि किसकी सरकार बन रही है और किसकी नहीं। वोटर अभी खामोश है, किधर जाएंगे पता नहीं।
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चुनावी चौसर में बाजी मारने के लिए आजकल सभाओं में नेता हर प्रत्याशी को जीतने के बाद मंत्री पद दिलाने की बात कर रहे हैं। उन्हें लगता है कि चंडीगढ़ की चौधर के लालच में जनता वोट दे देगी, जबकि लोग कह रहे हैं इन बड़बोले नेताओं को पहले विधायक का चुनाव तो हो जाने देना चाहिए।

शनिवार को शहर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग ठाकुर एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रामबिलास शर्मा ने सभाएं कीं। तीनों ने तीन प्रत्याशियों की सभा में विधायक बनने पर उन्हें मंत्री बनाने का ख्वाब दिखाया।
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गांव पन्हेड़ा में आयोजित एक सभा में शर्मा ने कहा कि नयनपाल रावत को विधायक बनाकर भेजो, इसे मंत्री बनाना हमारी जिम्मेदारी होगी।

राजनीत‌िक गण‌ित ठीक करने को कुछ भी करते हैं नेताजी

अनुराग ठाकुर ने ओल्ड फरीदाबाद में आयोजित एक सभा में कहा कि यदि विपुल गोयल को भारी बहुमत से विजय मिली तो वह प्रयास करेंगे कि उन्हें प्रदेश सरकार में मंत्री बनाया जाए।

जबकि मुजेसर गांव में हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि अगर बल्लभगढ़ क्षेत्र की जनता इस बार कांग्रेस प्रत्याशी लखन सिंगला को विधायक बनाकर भेजती है तो कांग्रेस की सरकार बनने पर चंडीगढ़ सचिवालय में बत्ती वाली कार उनका इंतजार करेगी।

उधर, निर्दलीय चुनाव लड़ रहे श्रम राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) शिवचरण लाल शर्मा अपने कार्यक्रमों में कह रहे हैं कि वह इस बार जीते तो कैबिनेट मंत्री बनेंगे, हरियाणा में किसी एक दल की सरकार नहीं बनने जा रही। उल्लेखनीय है कि 2009 के विधानसभा चुनाव में आजाद विधायक बने शर्मा को राजनीतिक गणित ठीक करने के लिए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंत्री बनाया।
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फरीदाबाद से इन्हें मिला मंत्री पद

गजराज बहादुर नागर
शारदा रानी
महेंद्र प्रताप सिंह
एसी चौधरी
कृष्णपाल गुर्जर
कर्ण सिंह दलाल
सुभाष कत्याल
जगदीश नायर
हर्ष कुमार
शिवचरण लाल शर्मा (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार)
अवतार भड़ाना (बिना विधायक बने छह माह के लिए मंत्री)
करतार सिंह भड़ाना (समालखा से जीतने के बाद मंत्री बने)
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