देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी एवं दिल्ली पुलिस से अवकाश ग्रहण करने वाली किरण बेदी के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होते ही राजधानी के वकील लामबंद होने शुरू हो गए हैं।
करीब 28 वर्ष पूर्व तीस हजारी अदालत में बेदी के नेतृत्व में वकीलों पर करवाए गए लाठीचार्ज को वे अब भी नहीं भूले हैं। कुछ वकील नेताओं ने तो बेदी को भाजपा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने पर आपत्ति जताते हुए भाजपा को बहिष्कार की चेतावनी दे दी है।
वहीं, राजधानी की सभी जिला अदालत की संयुक्त समन्वय कमेटी ने भी नाराजगी जताई है और जल्द ही इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय करने की घोषणा की है।
राजधानी में वर्ष 1988 को तीस हजारी अदालत परिसर में तत्कालीन पुलिस उपायुक्त किरण बेदी के नेतृत्व में पुलिस ने वकीलों पर बबर्रतापूर्ण लाठी चार्ज किया था।
75 हजार परिवार हो सकते हैं विरोधी
इस घटना के बाद पूरी दिल्ली के वकील हड़ताल पर चले गए थे। वकीलों का रोष ही है कि इस घटना के बाद कभी भी किरण बेदी को दिल्ली पुलिस में संवेदनशील पद नहीं मिला।
किरण बेदी को बृहस्पतिवार को भाजपा में शामिल किया गया और शुक्रवार को पूरा दिन वकीलों के बीच किरण बेदी ही चर्चा का विषय बनी रही।
हर वकील जानना चाहता था कि उनकी बार एसोसिएशन क्या अब बेदी के आने बावजूद भाजपा को समर्थन करेगा या नहीं। राजधानी में करीब 75 हजार से ज्यादा वकील पंजीकृत हैं और उनके परिवार के सदस्य भी वोटर हैं।
तीस हजारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव नसियार ने माना कि पूरे दिन बेदी के भाजपा में आने के बाद वकील उनकी प्रतिक्रिया जानने में लगे रहे। उन्होंने कहा कि वकील किसी भी हालत में बेदी द्वारा वकीलों पर किए लाठी जार्च को भूलने के लिए तैयार नहीं हैं।
वकीलों के लिए किरण बेदी बड़ा मुद्दा
वकीलों ने कहा कि सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशन की संयुक्त समन्वय कमेटी में यह मुद्दा रखा जाएगा और जो भी निर्णय होगा उसे अमल में लाया जाएगा।
कमेटी के चेयरमैन आरके वाधवा ने कहा कि वकीलों के लिए यह काफी अहम मुद्दा है और कमेटी में इस मुद्दे पर चर्चा तय है कि वकील किस का साथ दें।
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव खोसला ने कहा कि मोदी अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन बेदी को बड़ी जिम्मेदारी सौंपना वकीलों के प्रति गलत है।
'बेदी को नहीं मिलना चाहिए संवेदनशीन पद'
उन्होंने कहा कि मोदी को सोचना होगा कि जब न्यायमूर्ति वाधवा कमेटी ने किरण बेदी को संवेदनशील पद देने से मना किया था क्या वे अब कैसे संवेदनशील पद पर कैसे आ सकती हैं। क्या बेदी सभी वकीलों से अपने व्यवहार को लेकर माफी मांगेंगी।
दिल्ली बार काउंसिल के पूर्व सचिव मुरारी तिवारी ने स्पष्ट कहा कि लाठी र्चाज के बाद न्यायमूर्ति वाधवा कमेटी का गठन किया गया था और इस कमेटी ने स्पष्ट रूप से बेदी के व्यवहार को गैरजिम्मेदार ठहराते हुए कहा था कि उन्हें दिल्ली में किसी भी संवेदनशील पद न सौंपा जाए।
यही कारण है कि आज तक बेदी कभी भी सीधे आम लोगों से जुड़े पद पर नहीं रही। हम बेदी के कारण भाजपा का साथ नहीं दे सकते।