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कानून मंत्री के फर्जी डिग्री मामले पर बंटी काउंसिल

Sun, 17 May 2015 11:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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फर्जी डिग्री मामले में घिरे दिल्ली के कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर के मुद्दे पर बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (बीसीडी) दो फाड़ होती नजर आ रही है। काउंसिल ने 11 मई को पत्र लिखकर दक्षिणी जिला पुलिस उपायुक्त को इस मामले की जांच करने का निर्देश दिया था।
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काउंसिल के 10 सदस्यों ने पत्र लिखकर अपना विरोध जताते हुए इस कदम को गलत ठहराया है। इन सदस्यों ने पुलिस उपायुक्त से इसकी जांच के लिए कहा है। इस गतिरोध के मद्देनजर काउंसिल ने 20 मई को सदस्यों की बैठक बुलाई है। बीसीडी पदाधिकारियों ने सदस्यों द्वारा पत्र लिखे जाने की पुष्टि की है।

पत्र लिखने वाले सदस्यों का आरोप है कि बीसीडी कार्यकारिणी की बैठक में तोमर के वकील के आग्रह पर इस मामले में जवाब देने के लिए समय देने की सर्वसम्मति बनी थी। इसके मद्देनजर तोमर को 27 मई तक जवाब देने की मोहलत दी गई थी।
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मामले पर मीडिया में बयान देना गलत

इस मामले की जांच पुलिस उपायुक्त से करवाने की बात पर कोई सहमति नहीं बनी थी। इसकी जांच के लिए पदाधिकारियों द्वारा पुलिस को पत्र लिखा जाना बीसीडी के नियमों के खिलाफ है। बीसीडी चेयरमैन केके मनन व सचिव पुनीत मित्तल को संबोधित इस पत्र में कहा गया है कि इस बारे में मीडिया को जानकारी देना पूरी तरह गलत था।

जब तोमर को जवाब दाखिल करने के लिए समय दे दिया गया तो उसके खिलाफ पुलिस को जांच सौंपने को कोई मतलब नहीं है।इस मामले में पहले तोमर का जवाब आता और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जानी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

सदस्यों ने अपना विरोध जताते हुए यह भी कहा कि जब तोमर की डिग्री का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है तो बीसीडी पदाधिकारी को मीडिया में बयान देकर उसकी डिग्री को प्रथम दृष्टया फर्जी बताना पूरी तरह गलत है।
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