फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फ्लैट खरीदारों का दर्द: पति की मौत के बाद गहने बेच कर चुकाई थी किस्त, आठ साल बीतने पर भी नहीं मिला

Fri, 27 Sep 2019 09:04 AM IST
शाहरुख खान सुशील पांडेय, अमर उजाला, नोएडा
विज्ञापन
फाइल फोटो
विज्ञापन
पति की मौत के बाद आम्रपाली बिल्डर से लाख मिन्नतें करने के बाद भी वर्षा टंडन की किस्तें माफ नहीं हो पाई थीं। बिल्डर ने किस्त माफ करना तो दूर लेट फाइन तक लगा दिया। किस्त चुकाने के लिए वर्षा को अपने गहने तक बेचने पड़े। पैसे चुकाने और परिवार चलाने के लिए उनको कॉल सेंटर में काम करना पड़ रहा है। लेकिन इसका भी कोई फायदा नहीं हो पाया। 
विज्ञापन


उसका घर अब तक नहीं मिल पाया है। वर्षा टंडन के पति पुनीत टंडन बीएमडब्ल्यू में सेल्स मैनेजर थे। उन्होंने ट्रांसफर केस के माध्यम से 2011 में आम्रपाली ड्रीम वैली में 10 लाख रुपये कीमत के एक बेडरूम के फ्लैट में निवेश किया। सब कुछ अच्छा चल रहा था। तभी उनके पति की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई। उस समय उनकी बेटी दो वर्ष की थी। 

पति की मौत के बाद वह अपने पिता के घर जनकपुरी के किराये के मकान में चली आईं। यहां वह कॉल सेंटर में नौकरी कर परिवार का गुजारा चलाने लगी।  तभी आम्रपाली की ओर से उनको दो किस्तों में तीन लाख रुपये की मांग की गई। उन्होंने बिल्डर और उनके प्रबंधकों से मिन्नतें की। पति का डेथ सर्टिफिकेट भी दिखाया। लेकिन बिल्डर और प्रबंधक नहीं माने और किस्तें जमा कराने को कहा।
विज्ञापन


इसके बाद वर्षा ने अपने पूरे गहने बेचकर तीन लाख रुपये की किस्त चुका कर अपना फ्लैट बचाया क्योंकि बिल्डर फ्लैट कैंसल करने की धमकी दे रहा था और उनका सोचना यह था कि अगर फ्लैट मिल जाता है तो अपने माता-पिता और बेटी के साथ किराये के घर को छोड़कर अपने घर में रहेंगे। 
विज्ञापन

इसके बाद भी बिल्डर नहीं माना और उसने एक लाख रुपये की लेट पेनाल्टी लगा दी। यहां भी उन्होंने किसी तरह से 50 हजार रुपये चुकाए। इसके बाद जब बिल्डर के पास से उनके पास फिर फोन आया कि बची हुई 10 प्रतिशत रकम जमा करने पर पजेशन मिल जाएगा। जब उन्होंने पूछा कि काम पूरा नहीं हुआ है तो पजेशन कैसे मिलेगा तो फोन कट गया।

परिवार का खर्च चलाएं या फ्लैट के पैसे चुकाएं
वर्षा का कहना है कि उनके पिता टीबी के मरीज हैं और मां भी बीमार है। वहीं उनकी बेटी जो कि अब सात वर्ष की हो चुकी है। उसकी स्कूल की फीस प्रत्येक माह भरनी होती है। इन सबके बोझ के बीच सुप्रीम कोर्ट की ओर से बकाये पैसे जमा करने के आदेश के बाद उनकी समझ में यह नहीं आ रहा है कि अब वह पैसे कैसे चुकाएंगी। उनका कहना है कि पैसे चुकाने की बात छोड़िए उसे हर पल यही लगता है कि कहीं स्कूल की फीस नहीं दे पाने की वजह से बेटी का नाम न कट जाए।

बेटी की स्कूल की फीस हो माफ
उन्होंने सरकार से अपील की है कि बेटी की स्कूल की फीस माफ हो जाए तो उनका बोझ कम हो जाएगा। वह एक बार दिल्ली के मुख्यमंत्री से भी मिलने की कोशिश कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अभी तो यह भी नहीं पता कि फ्लैट के लिए कितने समय में कितना पैसा जमा करना है। इसके अलावा जो बचे पैसे हैं उसको देने के लिए समय दिया जाए। वहीं, उनकी ओर से दिए गए पैसे उनके प्रोजेक्ट में ही लगाने का वादा किया जाए।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें