तीसरी लापरवाही : सीवर लाइन डालने के क्रम में मजदूर पाइप के अंदर घुसकर हाथों से मिट्टी निकालते हैं। ऐसे में उनकी जान का खतरा बना रहता है, लेकिन इस बारे में नहीं सोचा गया। हादसा होने के बाद ही सोचने का तयशुदा नियम है।
बाकी के दो मजदूरों ने जैक नहीं हटाया
चौथी लापरवाही : घटना के दौरान दो मजदूर मशीन से पाइप को पुश कर रहे थे और दो मजदूर पाइप के अंदर थे। यहां पुश करने के बाद मशीन हटा ली जाती है और अंदर के मजदूर मिट्टी निकालते हैं, लेकिन जब ऊपर से पानी का रिसाव होने लगा तो बाहर के दोनों मजदूर भाग गए। अगर वह जैक को खींचकर पाइप का मुंह खोल देते तो अंदर के मजदूर आसानी से बाहर निकल सकते थे। बाहर के दोनों मजदूरों ने जल्दी-जल्दी में जैक नहीं हटाया और मजदूर अंदर ही रह गए।
काफी देर बाद पता चला कि दो मजदूर अंदर हैं
पांचवीं लापरवाही : जब इस तरह की घटना का पता चला तो सरकारी तंत्र तो वहां जमा हो गया, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक शुरुआत में यह नहीं पता था कि दो मजदूर अंदर भी फंसे हुए हैं, चूंकि जो मजदूर बाहर थे। वह वहां से रफूचक्कर हो गए। ऐसे में काफी बाद में पता चला कि अंदर दो मजदूर भी हैं। इस बात का पता तो होना ही चाहिए था कि स्थान पर कितने लोग काम कर रहे हैं।
25 मार्च से सलारपुर में 26.43 लाख रुपये के मद से डीएससी रोड के नीचे सीवर लाइन डालने का काम चल रहा है। यहां जमीन से 12 फीट नीचे सीवर लाइन डाली जा रही थी, जिसे डीएससी रोड से पार कराकर मेन सीवर लाइन में जोड़ने की योजना थी। इसका ठेका दनकौर निवासी हरिओम सिंह को मिला था। उसने दिल्ली के अख्तर को काम करने के लिए दिया था। मजदूर और मशीनरी अख्तर की ओर से लाई गई थी।
यहां एक स्थान पर सीवर लाइन के चार फीट ऊपर एक नाला क्रॉस कर रहा है। रात में निर्माणाधीन सीवर लाइन के ऊपर के पक्के नाले का बेस डैमेज होने से नाले में भरा सीवर का पानी नीचे की निर्माणाधीन सीवर लाइन में आने लगा। उस समय दो मजदूर पाइप के अंदर थे और दो मजदूर बाहर से मशीन से सीवर के बड़े पाइप को पुश कर रहे थे।
हादसे के दौरान बाहर के दोनों मजदूरों ने मशीन का जैक पाइप से नहीं हटाया और भाग खड़े हुए। ऐसे में दो मजदूर निर्माणाधीन सीवर लाइन की पाइप के अंदर फंस गए और वहां पानी भर गया और उन्होंने दम तोड़ दिया।