इस मामले में 2018 में दायर किए आरोपपत्र के मुताबिक 4 अप्रैल 2018 को पीडि़ता के पिता और उसके साथी कर्मी अपने गांव लौट रहे थे और उसी दौरान उन्होंने रास्ते में शशि प्रताप सिंह से लिफ्ट मांगी थी, लेकिन उसने लिफ्ट देने से इंकार कर दिया था। इसी दौरान उनके बीच तकरार हो गई। इसके बाद शशि सिंह ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल और अन्यों को मौके पर बुलाया और पीडि़ता के पिता की बेहरमी से पिटाई।
इस घटना में गंभीर रूप से घायल हुए पीड़िता के पिता को अस्पताल पहुंचाने के बजाए जेल में डाल दिया गया, जबकि उन्हें उपचार की जरूरत थी। उन्हें गहरी चोटें लगी थीं, जिस कारण 9 अप्रैल को उनकी न्यायिक हिरासत में मौत हो गई थी। इस घटना का एक वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल होता दिखा तो यह मामला प्रकाश में आया। इस वीडियो में पीडि़ता के पिता को बुरी तरह पीटता हुआ दिखाया गया।
उल्लेखनीय है कि उन्नाव में कुलदीप सेंगर और उसके साथियों ने 2017 में नाबालिग लड़की को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म किया था। इस मामले की जांच सीबीआई ने की। पीडि़ता की कार पर जानलेवा हमला होने की घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए इस केस से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई लखनऊ से दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में स्थानांतरित कर दी थी।