कलाधाम महोत्सव में अब मूर्ति कला के साथ रंगों की छटा बिखरनी शुरू हो गई है। मंगलवार को चित्रकला महोत्सव के शुभारंभ के बाद दूरदराज से आए कलाकारों ने कूची से कैनवास पर रंग भरने शुरू कर दिए हैं।
बनारस, जौनपुर, दिल्ली, रांची, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ के कलाकार अपने-अपने प्रदेशों की पृष्ठभूमि को अपने चित्रों में समेट रहे हैं। बनारस से आए प्रणायम सिंह बताते हैं कि वे स्त्री और संत इन दो विषयों पर ही चित्रांकन करते हैं।
रांची से आए हरिंद्र ठाकुर कहते हैं कि कलाकार किसी अनोखी दुनिया का नहीं होता, वह जमीन से जुड़ा होता है। हमेशा से वही कलाकार हिट रहा है, जो जमीनी हकीकत को अपनी चित्रकारी में दिखाता है।
वे बताते हैं कि जमीन से जुड़ी कला ही करोड़ों के भाव में बिकती है। कला महोत्सव में डा. लाल रत्नाकर वहां पहुंचने वाले छात्रों को कला का महत्व और कूची से कैनवास में रंग भरना बता रहे हैं।